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बिना आर्किटेक्ट के 10 सालों में 400 से ज्यादा नक्शे हुए पास….फर्जी सील और साइन करके 140 से अधिक ले आउट पास करा लिए

नगर निगम ने सस्पेंड भी कर दिया

बिलासपुर। नगर निगम ने पिछले 10 सालों में 400 से अधिक नक्शे उस आर्किटेक्ट के नाम पर पास कर दिए जो कि आर्किटेक्ट है ही नहीं। यही नहीं निगम ने इस विकास सिंह को आर्किटेक्ट बताकर निलंबित भी कर दिया है। जबकि निगम की ही लिस्ट में वह सिर्फ इंजीनियर के रूप में दर्ज है। साफ है पिछले 10 सालों में निगम की भवन शाखा ने इसमें पूरी मिलीभगत निभाई और बिना आर्किटेक्ट लाइसेंस और पूरी पड़ताल के ताबड़तोड़ नक्शे पास किए गए। सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि विकास सिंह नाम का कोई इंजीनियर है ही नहीं, दस्तावेजों की पड़ताल किए बिना निगम की लिस्ट में उसे शामिल कर लिया गया है। आर्किटेक्ट एसोसिएशन ने इस बारे में निगम कमिश्नर से मुलाकात की है और बताया कि इंजीनियर और आर्किटेक्ट की परिभाषा अलग है।
ज्ञात हो कि शहर में अवैध निर्माण पर
नगर निगम बिलासपुर ने कार्रवाई करते हुए संबंधित प्रोजेक्ट के इंजीनियर को आर्किटेक्ट बताते हुए विकास सिंह का लाइसेंस सस्पेंड कर एक साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है। बिना अनुमति एवं नियम विरुद्ध अवैध निर्माण पर जिम्मेदारी तय करते हुए पहली बार यह कार्रवाई की गई। रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट ने नक्शा तैयार करने एवं भवन निर्माण के सुपरविजन करने का शपथ पत्र दिया जाता है जबकि विकास सिंह जो कि इंजीनियर है वह नगर निगम बिलासपुर से लायसेंस क्रमांक 234 के माध्यम से पंजीकृत है।

आर्किटेक्ट पात्रता सूची में भी शामिल नहीं आर्किटेक्ट

एसोसिएशन ने इस बारे में निगम कमिश्नर अमित कुमार से मुलाकात भी की है और बताया कि इंजीनियर और आर्किटेक्ट की परिभाषा अलग है। एसोसिएशन के सदस्यों के मुताबिक आर्किटेक्ट वही हो सकता है जो कि वास्तु अधिनियम 1972 के अधीन पंजीकृत हो। संघ के मुताबिक काउंसिल आफ आर्किटेक्ट में पंजीकृत आर्किटेक्ट को किसी भी स्थानीय निकाय में अलग से पंजीकरण करवाने की कोई बाध्यता नहीं है। संघ ने यह भी कहा है कि जिन भी लोगों को निलंबित किया गया या नोटिस जारी किया गया है, वे काउंसिल आफ आर्किटेक्ट में पंजीकृत ही नहीं है और ना ही नगर निगम द्वारा अनुमोदित आर्किटेक्ट पात्रता सूची में शामिल हैं।

कई घोटाले आएंगे सामने

जिस विकास सिंह का नाम चर्चा में आया है उसका रिकॉर्ड देखकर नगर निगम का अमला भी हतप्रभ है। एक बहुचर्चित कर्मचारी की इसमें मिलीभगत है जो विकास सिंह के नाम पर लगातार आवेदन करता रहा है। नगर निगम के कर्मचारी भी नहीं जानते कि विकास सिंह है कौन। 2015 से लेकर 2025 तक सैकड़ों आवेदन विकास सिंह के नाम पर जमा हुए। यदि उनकी जांच होगी तो पता नहीं कितने घोटाले सामने आ सकते हैं. अब चुनौती नगर निगम की है कि वह किस विकास सिंह को सामने लाते हैं।

टीएंडसी में पदस्थ एक अधिकारी ने खेला है पूरा खेल

प्रारंभिक जांच में यह भी साफ हुआ है कि विकास सिंह के नाम पर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में पदस्थ रहे एक विवादित अधिकारी ने यह पूरा खेल खेला है। इसकी जानकारी मिलते ही निगम कमिश्नर अमित कुमार ने सख्त रवैय्या अपनाया है।इसके लिए कमिश्नर भवन शाखा पहुंचे और फाइलों की पूरी जांच की। जानकारी मिली है कि निगम कमिश्नर ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग में पदस्थ उस अधिकारी को भी बुलाया जो कि विकास सिंह के नाम पर पूरा फर्जीवाड़ा कर रहा था। आयुक्त ने इस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की भी बात कही है। निगम कमिश्नर ने विकास सिंह को भी तलब किया है। जानकारी के मुताबिक यह खेल आगे भी जारी रहता और कभी खुलासा नहीं होता यदि विकास सिंह का लाइसेंस निलंबित नहीं किया गया होता। निलंबन के बाद जब आर्किटेक्ट संघ ने इसका विरोध किया तो पूरा मामला सामने आ गया कि विकास सिंह आर्किटेक्ट है ही नहीं। वह सिर्फ एक इंजीनियर है।

जीआईएस मैपिंग, ड्रोन सर्वे और बिल्डिंग मैप लागू हो

संघ का कहना है कि आर्किटेक्ट का कार्य मुख्यतः डिजाइन, ड्राइंग और प्रस्ताव स्वीकृति तक सीमित होता है। यदि वे सुपरविजन हेतु नियुक्त हो, तो उनकी जिम्मेदारी केवल तकनीकी दोषों की निगरानी तक सीमित रहनी चाहिए। निर्माण कार्य को रोकने की न तो कानूनी शक्ति होती है, ना ही प्रशासनिक अधिकार। संघ ने मांग की है कि सुपरविजन और पूर्णता प्रमाण पत्र की वैधानिक व्यवस्था लागू हो। साथ ही स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस स्थिति में आर्किटेक्ट जिम्मेदार होंगे, और किस परिस्थिति में नहीं। डिजिटल मैपिंग सिस्टम को भी अनिवार्य बनाए जाने की मांग की गई है। प्रत्येक निर्माण की निगरानी के लिए जीआईएस मैपिंग, ड्रोन सर्वे और बिल्डिंग मैप को लागू किया जाना चाहिए। इस मुलाकात में आर्किटेक्ट संघ की ओर से नीना असीम अध्यक्ष आईआईए, देवाशीष घटक, श्याम शुक्ला, निर्मल अवावाल, अखिलेंद्र जैन, हेमंत जीवनानी, मुरतजा वनक, अंजलि अवग्रवाल, सोमेश वर्मा, स्वाति साहू, रजनीत वर्मा, अर्पित मिश्रा, ऋषम तिवारी, कुमार मंगलम, दीपेश डामा, कृति मोहन और विपुल देशपांडे शामिल थे।

टीएंडसी में पूर्व में पदस्थ रहे अधिकारी का नाम आ रहा सामने

सूत्र बता रहे है कि टी
एंडसी में पदस्थ रहने के दौरान मयूर गेमनानी काफी विवादों में रहे और पैसा लेकर काम करना और विवादित नक्शे को लाखों लेकर नक्शा पास करने में।ज्यादा आगे रहे।जिसकी चर्चा बाजार में जोरो से रही।यही नहीं पदस्थ रहने के दौरान सुर्खियों में बने रहे और पोस्टिंग तक को लेकर वे लगातार एडी चोटी तक की जोर लगा दिए,वे रुकने के लिए जोर लगाए और कुछ लोग उनको हटाने तक के लिए पड़े रहे।आखिर में राज्य सरकार से उनके हटने के आदेश आया और उनको ट्रांसफर करके रायपुर भेज दिया गया है।लेकिन सूत्र बता रहे है कि वे अभी तक ज्वाइन नहीं किए है।

शहर में लाखों और करोड़ो का किया है खेल

मयूर गेमनानी सेटिंग करके टीएंडसी में पदस्थ हो गए और इसका फायदा उठाकर उन्होंने लाखों नहीं बल्कि करोड़ों के खेल कर दिया।इसके बाद भी किसी को भनक तक नहीं लगी।
खुलासा तो तब हुआ जब पता चला कि आर्किटेक्ट विकास नाम का कोई व्यक्ति हकीकत में इंजीनियर नहीं है।बल्कि उसके नाम से फर्जी खेल किया जा रहा है।जिसका पूरा फायदा कोई और नहीं बल्कि खुद मयूर गेमनानी उठा रहा है।

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