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श्री कृष्ण मंदिरों में सुबह से ही रही रौनक पहुंचाते रहे भक्त

ब रात ठीक 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का हुआ जन्म सैकड़ो की संख्या में भक्ति रहे मौजूद

बिलासपुर। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी हर वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि प्रेम, भक्ति, त्याग और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। श्रीकृष्ण की जीवन गाथा हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर धर्म और सत्य की स्थापना करने का संदेश देती है।

बता दे शनिवार को पूरे देश के साथ-साथ बिलासपुर में भी जन्माष्टमी की धूम देखने को मिली। सुबह से ही भक्तगण मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करते नजर आए। शहर के श्री खाटू श्याम मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, वेंकटेश मंदिर तथा अन्य श्रीकृष्ण मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिरों में आकर्षक झांकियां, प्रकाश सज्जा और फूलों से सजावट ने भक्तों का मन मोह लिया। भक्तजन भजन-कीर्तन और संकीर्तन में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण के नाम में लीन होते रहे। विशेषकर रात 12 बजे जब भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया तो वातावरण जयकारों से गूंज उठा।

“नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के उद्घोष से मंदिरों में दिव्य और भक्तिमय दृश्य देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पावन बेला के साक्षी बने और श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का यह पर्व हमें प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलने, संकटों के बीच धैर्य बनाए रखने तथा धर्म की विजय पर विश्वास रखने की प्रेरणा देता है। बिलासपुर में इस वर्ष जन्माष्टमी का उल्लास पूरे दिनभर और रातभर देखने को मिला।

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