बिलासपुर में शंकराचार्य का बड़ा बयान: गौरक्षा और धर्म पर उठाए सवाल, यूजीसी नियमों को बताया ‘राष्ट्रद्रोही’
बिलासपुर के चकरभाटा स्थित परशुराम भवन में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सत्ता पक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजनेताओं की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।
गौरक्षा के मुद्दे पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 9 साल सत्ता में रहने के बावजूद यदि गौरक्षा नहीं हो सकी, तो इससे साफ है कि मंशा सिर्फ वोट लेने की है, काम करने की नहीं। शंकराचार्य ने विवादित बयान देते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ को हिंदू साबित करने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसे वे पूरा नहीं कर पाए, इसलिए वे हिंदू नहीं हैं।देश में धर्म के नाम पर बढ़ते ध्रुवीकरण और सनातन धर्म की स्थिति पर भी शंकराचार्य ने बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को बाहरी ताकतों से उतना खतरा नहीं है, जितना अंदर छिपे ‘कालनेमियों’ यानी छद्म भेषधारियों से है।
राजनीति पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यहां कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता, लोग मौके के हिसाब से अपने चेहरे और निष्ठाएं बदलते रहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज को इसका लाभ नहीं मिल रहा, तो ऐसी एकता का कोई महत्व नहीं है। अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सफाई देते हुए शंकराचार्य ने इसे साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि गौरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और हिस्ट्रीशीटरों के जरिए फंसाने की कोशिश हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी से जुड़े नियमों पर भी सख्त आपत्ति जताई और इसे हिंदू समाज को बांटने वाला ‘राष्ट्रद्रोही’ कानून बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की।