भाई ने ही रच दी हत्या की साजिश,सीसीटीवी से खुला राज

गायब हुआ भाई, जमीन विवाद निकली मुख्य वजह…
त्रिनयन की नजर से बच न सके 15 चेहरे
बिलासपुर/मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक सनसनीखेज अंधे कत्ल का खुलासा करते हुए पुलिस ने न सिर्फ हत्या की गुत्थी सुलझाई, बल्कि रिश्तों के भीतर छिपे लालच और साजिश की भयावह तस्वीर भी सामने ला दी। सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर राजपूत की हत्या किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि उनके अपने सगे भाई, रिश्तेदारों और परिचितों ने मिलकर कराई थी।
इस पूरे मामले का खुलासा पुलिस ने आधुनिक तकनीक ‘त्रिनयन एप’ और जिलेभर के सीसीटीवी कैमरों की मदद से किया। पुलिस ने इस केस में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 4 नाबालिगों को भी विधि अनुसार कार्रवाई के तहत भेजा गया है।
दरअसल 21 मार्च 2026 को दामोदर राजपूत घर से निकले, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनकी मोटरसाइकिल मनोहरपुर के पास सुनसान रास्ते में मिली। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने जिले के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी दौरान एक संदिग्ध स्लेटी रंग की हुण्डई ईऑन कार मृतक के पीछे-पीछे चलती दिखी। ‘त्रिनयन एप’ से रूट चार्ट बनाकर पुलिस ने कार नंबर ट्रेस किया और पूरा केस खुलता चला गया।
*सुपारी किलर तक पहुंची पुलिस*
कार के मालिक तक पहुंचने के बाद पुलिस ने संजय यादव को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने पूरा सच उगल दिया-दामोदर राजपूत की हत्या के लिए 10 लाख रुपये और 50 डिसमिल जमीन की सुपारी दी गई थी।
योजना के तहत 21 मार्च को आरोपी दामोदर का पीछा करते हुए मनोहरपुर के सुनसान इलाके में पहुंचे और गमछे से गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में भरकर कवर्धा जिले के जंगल में ले जाकर नदी किनारे गड्ढे में दफना दिया गया।
*साजिश की जड़ः संपत्ति और पारिवारिक दुश्मनी*
जांच में सामने आया कि दामोदर राजपूत की करीब 4 करोड़ की संपत्ति और सोना ही इस हत्या की असली वजह थी। उनके भाई और रिश्तेदार पहले से ही संपत्ति पर नजर गड़ाए हुए थे।
बाप-बेटे के बीच चल रहे विवाद का फायदा उठाकर आरोपियों ने पहले ही फर्जी नोटरी वचनपत्र तैयार कर लिया था, जिसमें संपत्ति को भाई-भतीजों के नाम करने की बात लिखी गई थी।
यहां तक कि हत्या के बाद शक भटकाने के लिए मृतक का मोबाइल प्रयागराज ले जाकर गंगा में फेंक दिया गया, ताकि लोगों को लगे कि वह साधु बनने चला गया है।
*त्रिनयन एप’ बना गेम चेंजर*
इस पूरे मामले में पुलिस का सबसे बड़ा हथियार ‘त्रिनयन एप’ साबित हुआ। इसी तकनीक की मदद से सीसीटीवी फुटेज को जोड़कर संदिग्ध कार की मूवमेंट ट्रेस की गई और हत्या की कड़ी दर कड़ी जुड़ती चली गई।
*पुलिस कार्रवाई,4 नाबालिक समेत 15 गिरफ़्तार*
पुलिस ने मामले में 4 नाबालिग समेत 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों से सुपारी के 96,000 रुपये नकद जब्त किए हैं। घटना में उपयोग किए गये कार, बाइक और स्कूटी को जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ लालपुर थाना में विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर अपराधियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है।
*वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश में बड़ी सफलता*
पूरे ऑपरेशन को पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग और एसएसपी मुंगेली भोजराम पटेल के निर्देशन में अंजाम दिया गया। साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने लगातार तकनीकी और मैदानी जांच कर इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश किया है।