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भारतीय सेना: शौर्य और बलिदान की परंपरा

कृषि महाविद्यालय में 78वाँ सेना दिवस संपन्न

एनसीसी इकाई की पहल

बिलासपुर — बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर में एनसीसी इकाई के तत्वावधान में दिनांक 15 जनवरी 2026 को 78वाँ सेना दिवस गरिमामय रूप से मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय सेना के शौर्य, साहस, कर्तव्यनिष्ठा एवं बलिदान की महान परंपरा से छात्र-छात्राओं को अवगत कराना रहा।

सेना दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किए गए, जिनमें भारतीय सेना द्वारा राष्ट्र की रक्षा हेतु किए गए अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और अनुकरणीय योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।

महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन. के. चौरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय सेना ने सदैव अपने प्राणों की आहुति देकर देश की सीमाओं की रक्षा की है। उनका शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है।

एनसीसी प्रभारी डॉ. विनोद निर्मलकर ने जानकारी दी कि 15 जनवरी 1949 को पहली बार सेना दिवस मनाया गया था। यह दिन भारतीय सेना के पुनर्गठन की ऐतिहासिक वर्षगांठ को रेखांकित करता है। उन्होंने बताया कि 78वें सेना दिवस की थीम “भारतीय सेना: शौर्य और बलिदान की परंपरा” रखी गई है, जो सेना के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती है।

कार्यक्रम में डॉ. एस. के. वर्मा, मुख्य वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र; डॉ. आर. के. एस. तोमर, वरिष्ठ प्राध्यापक सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में एनसीसी इकाई कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर एवं साइंस कॉलेज, बिलासपुर के 27 एनसीसी कैडेटों की विशेष सहभागिता रही।

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