महिलाओं से दुर्व्यवहार और अवैध वसूली के आरोपों में घिरे इंजीनियर पर कार्रवाई नहीं

CEO पर त्वरित कार्रवाई, इंजीनियर पर शिकायत के बाद भी चुप्पी; सरपंच संघ ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दो जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) पर त्वरित कार्रवाई की गई, लेकिन एक इंजीनियर के खिलाफ गंभीर शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे प्रशासन की “दोहरी नीति” को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दो CEO हटे, इंजीनियर पर नहीं कार्रवाई
हाल ही में जिला प्रशासन ने गौरेला और पेंड्रा जनपद पंचायतों के CEO को हटाकर नई व्यवस्था लागू की। इस फैसले को लेकर पहले से ही प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं थीं।
वहीं दूसरी ओर, मरवाही क्षेत्र में पदस्थ एक इंजीनियर पर गंभीर आरोप लगने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है।
25 फरवरी को सौंपा गया था ज्ञापन
मरवाही सरपंच संघ ने 25 फरवरी 2026 को जिला पंचायत CEO को ज्ञापन सौंपकर संबंधित इंजीनियर को हटाने की मांग की थी। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इंजीनियर जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार करता है और कार्यों में अनावश्यक बाधा उत्पन्न करता है।
इसके बावजूद अब तक न तो उनका संलग्नीकरण समाप्त किया गया है और न ही किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आई है।
सरपंच संघ के आरोप
सरपंच संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि इंजीनियर द्वारा निर्माण कार्यों की फाइलों में जानबूझकर देरी की जाती है, महिलाओं से अभद्रता और दुर्व्यवहार करता है
जिससे भुगतान अटक जाता है और ग्राम पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित होते हैं। साथ ही जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
7 दिन का अल्टीमेटम, अब आंदोलन की तैयारी
लगातार अनदेखी से नाराज सरपंच संघ ने 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी थी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ, लेकिन अब संघ के जिला अध्यक्ष का कहना है कि जल्द ही आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है।
शासन निर्देशों के पालन पर सवाल
इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़ शासन के दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिनमें अधिकारियों की पदस्थापना और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
प्रशासन का पक्ष आना बाकी
अब तक इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है और आरोपों की जांच किस स्तर तक की जाती है।