धान खरीदी में गड़बड़ी, पांच लाख का भुगतान न मिलने से किसान ने दी आत्महत्या की चेतावनी

रिकॉर्ड में ‘जीरो’, पर किसान के पास ऑफलाइन रसीद सिस्टम की खामियों से परेशान सुमित ने कलेक्टर से लगाई गुहार
बिलासपुर। मस्तुरी विकासखंड के ग्राम दोमुहानी निवासी किसान सुमित कुमार इन दिनों अपनी मेहनत की कमाई के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। दो मुहानी में रहने वाले सुमित कुमार कलेक्टर को आवेदन दिया है। उन्होंने कहा है की इस वर्ष संबंधित धान खरीदी केन्द्र में 119 क्विंटल धान बेचा था, जिसकी कीमत पांच लाख रुपये से अधिक है। उसे धान बिक्री की ऑफलाइन रसीद भी दी गई। लेकिन जब भुगतान की बारी आई। तो विभागीय अफसरों ने रिकॉर्ड में गड़बड़ी का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए।अधिकारियों ने सुमित को बताया कि ऑनलाइन सिस्टम में उसकी धान बिक्री का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, इसलिए भुगतान नहीं हो सकता। इस गड़बड़ी से परेशान सुमित पिछले पांच महीनों से कभी धान खरीदी केन्द्र तो कभी विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कहीं से भी समाधान नहीं मिला। थक-हार कर सुमित ने सोमवार को जनदर्शन में कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की और आत्महत्या तक की चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने सौ क्विंटल से अधिक धान इसी केन्द्र में बेचा था, और तब समय पर भुगतान मिल गया था, लेकिन इस बार सिस्टम की खामियों और लापरवाही की वजह से उन्हें मानसिक यातना झेलनी पड़ रही है।
किसान बोला, नहीं मिला मेहनत का पैसा तो करूंगा आत्महत्या
कलेक्टर के पास पहुंचे पीड़ित किसान ने धान का पैसा देने की मांग की है।किसान का कहना है कि वह विभागीय चक्कर काटकर थक चुका है और कोई भी उसे सही जवाब नहीं दे रहा है।जिसके कारण दिनो दिन उसकी परेशानी बढ़ती जा रही है। इसी तरह का रवैया रहा तो एक दिन आत्महत्या कर लूंगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बैंक के नोडल अधिकारी ने नहीं उठाया फोन
इस मामले कि जानकारी के लिए जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के नोडल अधिकारी आशीष दुबे से सम्पर्क करने की कोशिश की गई।लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।