माल गाड़ियों की स्पीड बढ़ रही, एसईसीआर ने एक साल में 30 हजार 400 करोड़ लदान से और 1600 करोड़ पैसेंजर ट्रेनों से कमाए
बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने बीते वित्तीय वर्ष यानी एक वर्ष में माल लदान से 30 हजार 400 करोड़ रुपए और पैसेंजर ट्रेनों से 1600 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया है।
यह जानकारी देते हुए महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने बताया कि इसके अलावा विकास की दिशा में भी जोन ने ढेरों उपलब्धियां हासिल की है।
जोनल मुख्यालय के सभा कक्ष में प्रेस से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान यात्री सेवाओं, संरक्षा, माल-ढुलाई, आधारभूत संरचना, डिजिटल पहल तथा तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने इस वर्ष 8.30 करोड़ से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% अधिक है। मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या 35,469 तथा पैसेंजर ट्रेनों की संख्या 50,407 तक पहुंच गई है। वर्ष के दौरान 4 नई ट्रेनें प्रारंभ की गईं, 7 ट्रेनों का विस्तार किया गया तथा 36 ट्रेन-जोड़ियों में 28 नए स्टापेज दिए गए। 5 आईसीएफ़ रेकों को आधुनिक एलएचबी कोचों में बदला गया। त्योहारों के दौरान 32 आरक्षित विशेष ट्रेनों के 126 ट्रिप एवं 9 अनारक्षित विशेष ट्रेनें चलाई गईं। पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु भारत गौरव ट्रेनों के 84 ट्रिप चलाए गए।
माल-ढुलाई में नए कीर्तिमान
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 261 मिलियन टन माल-ढुलाई कर नया कीर्तिमान बनया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.1% अधिक है। इस उपलब्धि के साथ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे भारतीय रेल में द्वितीय स्थान पर रहा। कोयला परिवहन में 199.50 मिलियन टन का राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित करते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली। माल-ढुलाई की वजह से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने कुल 32,000 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व अर्जित किया। इसमें 30,400 करोड़ रुपए से अधिक आय माल-ढुलाई से मिली। परिचालन अनुपात 54.87% से सुधरकर 53.30% हो गया।
संरक्षा में भी सुधार:–
उन्होंने बताया कि रेल संरक्षा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुर्घटनाओं में 45% की कमी दर्ज की। 18 रोड ओवर ब्रिज एवं 27 रोड अंडर ब्रिज बनाकर 34 लेवल क्रॉसिंग बंद किए गए तथा 7 गेटों का इंटरलॉकिंग कार्य पूर्ण किया गया। सिग्नलिंग में सुधार के तहत 11 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग तथा 25 स्टेशनों पर ईआई मोडिफिकेशन किया गया। 101 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में ‘कवच’ प्रणाली लगाए गए। इसके ट्रैक साइड कार्यों में भी काम चल रहा है।