मृत किसान के खाते से निकलता रहा पैसा….सहकारी बैंक के ब्रांच मैनेजर की भूमिका संदिग्ध

बिलासपुर। जिला सहकारी बैंक के एक ब्रांच से गंभीर मामला सामने आ रहा है। शाखा से एक मृत किसान के खाते से लाखों रुपए निकाले गए है। जबकि मृत किसान के परिजन मृत की जानकारी पहले ही ब्रांच में दे चुके थे। पैसे के इस निकासी में ब्रांच मैनेजर की भूमिका संदिग्ध बताया जा रहा है।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की एक ब्रांच बेलसरी में भी है।जिसमें सैकड़ों किसानों के खाते है। धान बेचने के बाद किसानों का पैसा उनके खातों में जमा होता है। इस ब्रांच से एक गंभीर मामला सामने आ रहा है। पदुमराम सतनामी नाम के किसान की मृत्यु 26 नवंबर 2021 को हो गई है। लेकिन उसके खाते 2023 तक पास निकलता रहा। यही नहीं किसान के खाते से दूसरे के खाते में पैसा ट्रांसफर होता रहा। मृत किसान भगत सिंह आजाद नगर, तिफरा बिलासपुर का निवासी था, उसका खाता तखतपुर के बेलसरी शाखा में संचालित होता था।इसमें सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर मृत किसान के खाते से पैसा कौन निकलता रहा । निकासी फार्म में मृत किसान का दस्तखत या अंगूठा कौन लगाता रहा ,पैसा भी दो चार हजार रुपए नहीं निकाला गया है। लगभग 7 लाख रुपए निकाला गया है।
मृत किसान के परिजन की माने तो किसान के मौत की जानकारी तत्काल ही शाखा में दी गई थी। इसके बावजूद उनका खाता न केवल चालू रखा गया, बल्कि उसमें आने वाली राशि और होने वाली निकासी दोनों बिना किसी व्यवधान के चलते रहे। और तो और किसान की मौत के मात्र चार दिन बाद यानी 29 नवंबर 2021 को भी खाते से बड़ी राशि निकाली गई। परिजनों को इस निकासी की न तो कोई जानकारी दी गई, न ही खाते को मृतक खाते के नियमों के तहत बंद किया गया। जबकि नियम है कि खातेदार की मृत्यु के बाद खाता बंद कर दिया जाता है। नॉमिनी को कागजी कार्रवाई करने के बाद किया जाता है। नॉमिनी को प्रमाणित दस्तावेज जमा करना पड़ता है। इसके बाद ही उसे खाते में जमा राशि निकालके दिया जाता है। लेकिन बेलसरी शाखा में ठीक उलटा हुआ और खाता सालों तक चलता रहा। यही नहीं निकासी और पैसे का ट्रांसफर भी होता रहा।
*2021- 2023 तक लाखों की आवाजाही.सिस्टम खामोशी*
पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि मृतक किसान के खाते में 2021 से 2023 के बीच लाखों की राशि धान खरीदी और अन्य योजनाओं के नाम पर आती रही और उसी सिलसिले में रकम का हस्तांतरण भी जारी रहा। जानकारों का कहना है कि इस मामले में यह संभावना नकारा नहीं जा सकती कि पूरी प्रक्रिया बैंकिंग स्तर की मिलीभगत से संचालित होती रही। हालांकि किसी एक अधिकारी का सीधा नाम न लेते हुए इतना जरूर स्पष्ट है कि यह सब एक शाखा के नियमित संचालन के दौरान और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी या निगरानी के दायरे में ही होता रहा
*शाखा प्रबंधक के ट्रांसफर ने खोला बड़ा राज*
घोटाले के सबसे संदिग्ध पहलुओं में से एक वह समय है जब शाखा के तत्कालीन प्रबंधक का स्थानांतरण चंद्रपुर हुआ। दिलचस्प बात यह है कि स्थानांतरण होते ही मृतक किसान का खाता बंद कर दिया गया, लेकिन ठीक एक महीने बाद जब वही अधिकारी दोबारा तखतपुर लौटे, तो मृतक का खाता फिर से चालू कर दिया गया। यह निर्णय ही पूरे मामले को और अधिक संदेहों में घेरता है कि आखिर किस आवश्यकता या कारण से एक मृतक का पुराना खाता पुनः खोला गया।
वर्जन
मृत किसानों के खातों की जांच पहले से चल रही है। सहकारी बैंक भी जल्द इस मामले की जांच कराएगी। गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रभात मिश्रा
सीईओ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक