यूजीसी नियमों के खिलाफ सड़क पर उतरा सवर्ण समाज,बिलासपुर में ज़ोरदार प्रदर्शन….यूजीसी नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग,बिलासपुर में प्रदर्शन…..

छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप, यूजीसी अधिनियम पर बवाल….
सड़कों पर आक्रोश, हाथों में तख्तियां—यूजीसी के खिलाफ बिलासपुर की आवाज़….
सर्व सवर्ण समाज का विरोध तेज: यूजीसी समता के संवर्ध अधिनियम 2026 के खिलाफ कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर।यूजीसी से जुड़े मामले को लेकर देशभर में लगातार विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। भले ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसे निरस्त कर
दिया गया हो, लेकिन इसके बावजूद समाज के विभिन्न वर्गों में नाराज़गी थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी कड़ी में बिलासपुर में भी जोरदार विरोध देखने को मिला।
बता दे बिलासपुर में सर्व सवर्ण समाज संगठन के सैकड़ों लोग एकजुट हुए और रैली निकालकर यूजीसी विनियमन 2025–26 और समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इन नियमों को संविधान की मूल भावना के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।रैली के बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि 13 जनवरी 2026 से लागू यूजीसी के नए नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव, असमानता और अविश्वास का माहौल बना रहे हैं, जो छात्रों के भविष्य के लिए गंभीर खतरा है।सर्व सवर्ण समाज संगठन का आरोप है कि नए विनियमों में समानता की परिभाषा को सीमित कर दिया गया है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को इस कानून के तहत कोई संरक्षण नहीं मिल पा रहा है। संगठन का कहना है कि यह कानून संवैधानिक समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जांच और इक्विटी समितियों का गठन एकतरफा किया गया है, जिसमें सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व नहीं मिला। इससे छात्रों को अपनी बात रखने और न्याय पाने का अवसर नहीं मिल पा रहा है प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि यह कानून शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत तनाव को बढ़ावा दे सकता है और वर्षों से चले आ रहे सौहार्दपूर्ण शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुँचा सकता है।संगठन का कहना है कि अधिनियम के कई प्रावधान अस्पष्ट हैं, जिनका दुरुपयोग होने की पूरी संभावना है। इससे शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा, शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होगी और संस्थानों की स्वायत्तता भी कमजोर होगी।इसके साथ ही संगठन ने चेतावनी दी कि यह अधिनियम नवाचार, अनुसंधान, शिक्षकों की नियुक्ति, छात्रों के मूल्यांकन और संस्थानों की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। साथ ही, इससे उच्च शिक्षा संस्थानों पर आर्थिक और प्रशासनिक बोझ भी बढ़ेगा।पहली, यूजीसी अधिनियम 2026 को तत्काल समाप्त किया जाए।दूसरी, इसके संवैधानिक और व्यावहारिक प्रभावों की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए।
और तीसरी, यूजीसी अधिनियम 2012 को पूर्ववत लागू रखा जाए।
कई समाज के लोग रहे शामिल
अग्रवाल समाज सिंघी समाज गुजराती समाज क्षत्रीय समाज महाराष्ट्रियन समाज जैन समाज कायस्थ समाज के पदाधिकारीगण व भारी संख्या में सभी समाज के लोग विशेषकर महिला शक्ति ने एक बड़ी रैली देवकीनंदन चौक से कलेक्टर आफिस तक निकाली एवं कलेक्टर को राष्ट्रपति एव प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ अपना विरोध दर्ज किया। इस अधिनियम को सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करने वाला बताया जा रहा है।
अधिनियम को वापस लिया जाए
सर्व सवर्ण समाज ने यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।अन्यथा आंदोलन की गति तेज होती जायेगी और इसका असर पूरे भारत देश में देखने मिलेगा।
उच्च शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
सर्व सवर्ण समाज ने उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाज का कहना है कि इस अधिनियम से उच्च शिक्षा में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव होगा और उनकी शिक्षा के अधिकार का हनन होगा।वही समाज ने उच्च शिक्षा में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन के समाज ने दिखाया एकता का प्रतीक
सर्व सवर्ण समाज, बिलासपुर का यह विरोध प्रदर्शन यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक है। समाज अपनी मांगों को लेकर गंभीर है और इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
दीआंदोलन की चेतावनी
सर्व सवर्ण समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। समाज ने सभी वर्गों से एकजुट होकर इस अधिनियम के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया है।