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राखड़ के मलबे में दबे 3 मजदूरों की मिली लाश….कलेक्टर,एसपी के निर्देश पर चला 40 घंटे तक ऑपरेशन

लगभग 40 घंटे चले इस ऑपरेशन में राखड़ के मलबे में फंसे 3 शव को निकाल लिया गया है। मृतकों में अवधेश कश्यप पिता निखादराम कश्यप निवासी तागा जांजगीर चांपा, प्रकाश यादव पिता परदेशी यादव निवासी अकोली बलौदाबाजार,जयंत साहू पिता काशीनाथ साहू निवासी जबड़ापारा सरकंडा बिलासपुर हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए बिलासपुर सिम्स भेजा गया है।

प्रबंधक,मैनेजर,ऑपरेशन इंचार्ज और अन्य लोगों के खिलाफ जुर्म दर्ज

बिल्हा विधायक पहुंचे मौके पर,दिए आवश्यक दिशा निर्देश

बिलासपुर। मुंगेली जिला स्थित प्लान्ट का सायलो गिरने से एक मजदूर की मौत तीन के गायब होने की खबर है। हादसे के बाद बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक मौके पर पहुंचे। जिन्होने कलेक्टर,एसपी।और अन्य अधिकारियों से गंभीरता से चर्चा की और बचाव कार्य करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

बता दे कि मुंगेली जिले के सरगांव अंतर्गत कुसुम पावर प्लांट में सायलो गिरने से हड़कंप मच गया था। आनन फानन में पता चला कि कुछ मजदूर दबे हुए है। जो मजदूरों को फंसे रहे और निकाल कर अस्पताल भेजा गया उसमें से एक की मौत हो गई जबकि कुछ लोग अभी भी मलबे में दबे हुए है।
जिनको निकालने का प्रयास जारी है।इसके लिए बाहर से हेवी क्रेन
और अन्य मशीन भी मंगवाया गया है। जिससे सायलो और मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।
इस कार्य में मुंगेली जिले के अलावा बिलासपुर,बलौदाबाजर और जांजगीर जिले के पुलिस अफसर और अन्य अधिकारी भी लगे हुए है।

बिल्हा विधायक बोले,प्लांट की बड़ी लापरवाही

बिल्हा विधायक धरम लाल कौशिक ने कहा कि निश्चित रूप से प्लान्ट प्रबन्धन ने बड़ी लापरवाही की है। उन्होने कहा कि हादसे के कारण का पता लगया जाएगा। राज्यस्तरीय जांच के बाद सारी गड़बड़ी सामने आ जाएगी। 24 घंटे पहले हुए हादसे के बाद अभी तक रेस्क्यू अभियान की स्थिति ठीक नहीं है। गायब अब तक चार मजदूदों की कहीं अता पता नहीं है। कयास लगाया जा रहा है कि गायब मजदूर या कर्मचारी मलवा के नीचे दबे हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि रेस्क्यू जारी है,लेकिन सफलता नहीं मिली है। बाहर से बुलवाया गया क्रेन काम नहीं कर रहा है।

प्लांट के मालिक का किसी तरह का कोई बयान नहीं,हुए फरार

रामबोड़ स्थित कुसुम शेल्डर प्लान्ट के मालिकों का नाम सतीश अग्रवाल, आदित्य अग्रवाल, विशाल अग्रवाल समेत दो अन्य लोग है। अभी तक प्रबंधन की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन युद्धस्तर पर रेस्क्यू अभियान चला रहा है। लेकिन अभियान को अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। सायलो को अब कटर मशीन से काटकर हटाने का प्रयास किया जा रहा है। सायलों करीब पांच सौ टन से अधिक है।

प्रोडक्शन की हड़बडी

कुसुम शेल्डर प्लान्ट का काम करीब तीन साल पहले शुरू हुए। एक साल पहले अधूरे प्लान्ट से ही प्रोडक्शन शुरू कर दिया गया। इस दौरान प्रदूषण को लेकर आस पास के ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया। करीब 20-25 दिन पहले ही सायलो इन्स्टाल किया गया। बताया जा रहा है कि सायलो का इन्स्टालेशन बहुत ही जल्दबाजी में किया गया। ना तो उसका ठीक रिस्टोरेशन की कार्रवाई की गयी और ना ही ट्रायल ही किया गया। निर्धारित मापदण्डों को दरकिनार कर लालची प्रबंधन ने सीधा प्रोडक्शन शुरू कर दिया। इस तरह प्रबंधन ने सैकड़ों मजदूरों की जिन्दगी को दांव पर लगा दिया।

भारी लापरवाही उजागर

प्लान्ट में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि प्लान्ट में करीब करीब 375 से अधिक मजदूर और कर्मचारी शिफ्ट में काम करते हैं। हड़बड़ी में सायलो इन्स्टालेशन के बाद प्रोडक्शन के दौरान स्ट्रक्चर हिलता था। मामले में शिकायत भी हुई। लेकिन प्रबंधन ने शिकायत को एक कान से सुना और दूसरे से बाहर निकाल दिया। घटना के समय कर्मचारियों का लंच था। कुल चार मजदूर चपेट में आ गए।

तीन मजदूरों की तलाश

करीब 80 से 120 टन सायलो गिरने से चार मजदूर चपेट में आ गए। दगौरी निवासी मजदूर मनोज की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी। यद्यपि मजदूर को श्री राम केयर में भर्ती कराया गया। लेकिन ड़ॉक्टर की टीम ने मृत घोषित कर दिया। गायब तीन अन्य मजदूरों का नाम सुपरवाइजर जयंत साहू, अखिलेश और प्रकाश यादव है। बताया जा रहा है कि तीनो सायलो के नीचे दबे हो सकते हैं।

घटना के लिए प्रशासन जिम्मेदार

हादसे ने जिला प्रशासन की लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। साथ ही पूंजीपति प्लान्ट मालिकों की पोल भी खोल दिया है। रसूखदार प्लान्ट मालिक के दबाव में जिला प्रशासन का सुरक्षा महकमा हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहा। और घटना में चार मजदूरो की जिन्दगी को दांव पर लगा दिया। बताते चलें कि उद्योग खोलते समय मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यस्था का पूरा ध्यान रखा जाता है। लेकिन अधिकारी अपनी जेब की परवाह कर प्लान्ट के हाथों मजदूरों की जिन्दगी को दांव पर लगा देते हैं।

गायब हो गया प्रबंधन

प्लान्ट मालिक का सरकार और अधिकारियों में अच्छी धमक है। बेशक जांच को लेकर बड़ी बड़ी बाते कहीं जा रही हो…लेकिन अन्त में पूंजीपति का बचना निश्चित है। बहरहाल स्थानीय लोगों मे घटना को लेकर जमकर आक्रोश है। प्रबंधन ने भी अभी तक मुंह नहीं खोला है।

मृतक के परिजनों ने मुआवजे को लेकर किया हंगामा,बिना मुआवजे के शव नही ले जाएंगे घर

कुसुम प्लांट में हुए भीषण हादसे में कई लोग घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल मनोज घृतलहरे की इलाज के दौरान श्रीराम केयर हॉस्पिटल, नेहरू नगर में मौत हो गई। शुक्रवार को शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल बिलासपुर ले जाया गया, जहां परिजनों ने मुआवजे की मांग को लेकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन न तो उनसे बात कर रहा है और न ही मुआवजे की कोई पहल कर रहा है। उन्होंने कहा कि वे गरीब परिवार से हैं और दाह संस्कार का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। प्रशासन और प्लांट प्रबंधन से चर्चा पुलिस और प्रशाशनिक अधिकारीयों की समझाइस के बाद तत्कालिक 1 लाख रुपये मुआवजा दिलाये जाने के बाद स्थिति सम्भली तब परिजन शव को घर ले जाने तैयार हुए।

प्लांट के मैनेजर,प्रबंधक,इंचार्ज के खिलाफ अपराध हुआ दर्ज

प्लांट के अंदर
सेलों टैंक में लापरवाहीपूर्वक क्षमता से अधिक मात्रा में माल भरने से सेलों टैंक के टूटकर गिरने से पीड़ित मनोज घृतलहरे को आई चोट से इलाज दौरान मृत्यु हो गई। मृतक के मामा की रिपोर्ट पर पुलिस ने कुसुम प्लांट के ऑपरेशन मैनेजर अनिल प्रसाद,इंचार्ज अमित केडिया.प्रबंधक एवं अन्य प्रबंधक एवं अन्य लोगों के खिलाफ अपराध कायम कर लिया गया है।

कलेक्टर,एसपी और सीईओ पहुंचे घटनास्थल

प्लांट हादसे के बाद जिले के कलेक्टर,एसपी सीईओ और अन्य आला अधिकारी समेत पुलिस कर्मी भी दिन और रात लगे रहे। मौके पर खड़े होकर बचाव कार्य के लिए जूझे रहे।जिन्होने पल पल की जानकारी ली और पीड़ितों को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।

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