एसआई के डिमोशन करने का डीजीपी का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द, मामूली दंड के आधार पर पदोन्नति निरस्त करना मनमाना और अवैध, तीन माह में प्रमोशन के निर्देश
एसआई को डिमोशन कर एएसआई बनाने के डीजीपी के आदेश को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल मामूली दंड के आधार पर पदोन्नति निरस्त करना न केवल मनमाना है बल्कि अवैध है। तीन माह के भीतर एएसआई को एसआई के पद पर पदोन्नत कर सभी परिणामी लाभ उपलब्ध करवाने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया है।
बिलासपुर। बिलासपुर हाईकोर्ट ने जशपुर जिले में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) कृष्ण कुमार साहू को महत्वपूर्ण राहत दी है। जस्टिस अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने डीजीपी द्वारा उनकी पदोन्नति रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामूली दंड को आधार बनाकर पदोन्नति रोकना न केवल मनमाना बल्कि अवैध है। आदेश में स्पष्ट किया गया कि साहू को 2021 की पात्रता सूची के आधार पर उप निरीक्षक (एसआई) पद पर पदोन्नति दी जाए और तीन माह के भीतर सभी परिणामी लाभ उपलब्ध कराए जाएं।
कृष्ण कुमार साहू का नाम 21 मई 2021 को एसआई पदोन्नति की पात्रता सूची में शामिल किया गया था। उस समय उनके खिलाफ कोई दंड प्रभावी नहीं था। हालांकि, 18 नवंबर 2021 को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप पर उन्हें एक वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का मामूली दंड दिया गया। इसी आधार पर डीजीपी ने 8 अगस्त 2022 को उनकी पदोन्नति रद्द कर दी थी।
याचिकाकर्ता का पक्ष:–
एएसआई साहू ने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में दलील दी कि जब पात्रता सूची बनी थी, उस समय उनके खिलाफ कोई दंड लागू नहीं था। बाद में दिया गया मामूली दंड पिछली तिथि से लागू नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने उन्हें पहले ही उपयुक्त पाया था, इसलिए डीजीपी का आदेश अनुचित और असंगत है।
हाईकोर्ट का फैसला:–
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों का तर्क सुनने के पश्चात कहा कि पात्रता अथवा अयोग्यता का आकलन केवल डीपीसी की बैठक की तारीख पर ही किया जा सकता है। बाद में लगाया गया मामूली दंड किसी अधिकारी की पदोन्नति रोकने का आधार नहीं बन सकता। न्यायालय ने डीजीपी का 8 अगस्त 2022 का आदेश रद्द करते हुए पुलिस विभाग को निर्देशित किया कि कृष्ण कुमार साहू को एसआई पद पर पदोन्नत किया जाए और तीन माह के भीतर सभी वेतन व सेवा संबंधी लाभ दिए जाएं।