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रामसर साइट में पानी की लूट कोपरा जलाशय से टैंकरों में खुलेआम जल चोरी, पक्षियों पर मंडराया खतरा

अंतरराष्ट्रीय संरक्षित क्षेत्र में बड़ी लापरवाही कोपरा रामसर साइट से पानी चोरी, वन विभाग की भूमिका संदिग्ध

बिलासपुर । कोपरा जलाशय से सामने आई तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। छत्तीसगढ़ के पहले रामसर साइट में खुलेआम टैंकर भरकर पानी चोरी किया जा रहा था। अब सवाल उठ रहे हैं वन विभाग की निगरानी और जिम्मेदारी पर।

दरअसल ये तस्वीरें हैं कोपरा जलाशय की…दिसंबर में जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर साइट घोषित किया गया। जहां प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आवास है। लेकिन गुरुवार को इसी संरक्षित जलाशय से जनरेटर से चलने वाले पंप लगाकर 12 हजार और 20 हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों में पानी भरा जा रहा था। जिस हिस्से से पानी निकाला जा रहा था, वहीं बड़ी संख्या में पक्षी मौजूद थे। तेजी से पानी खींचे जाने का असर जलाशय के जलस्तर पर भी साफ नजर आया। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह का जल दोहन पक्षियों के प्राकृतिक रहवास के लिए खतरनाक है। बताया जा रहा है कि पानी भरने वाले दोनों टैंकर मध्यप्रदेश पासिंग के हैं एमपी 16 एए 0011 और एमपी 22 एच 1501 अंतरराज्यीय टैंकरों की मौजूदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। घटना के दौरान वन विभाग की एक सरकारी गाड़ी मौके पर पहुंची। कुछ बातचीत हुई और गाड़ी आगे बढ़ गई। न टैंकर रोके गए और न ही पंप हटवाया गया, जिससे विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई। बिलासपुर सीसीएफ से जब इस सम्बंध में बात हुई तो उन्होंने कहा रामसर साइट से पानी चोरी होना गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। रामसर साइट घोषित होने के बाद यहां मछली पकड़ने और पक्षियों को नुकसान पहुंचाने वाली सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद इस तरह की घटना लापरवाही की ओर इशारा करती है। इतना ही नहीं, रामसर साइट घोषित होने के बाद लगाए गए सूचना बोर्ड भी चोरी हो चुके हैं। यह साफ दिखाता है कि निगरानी व्यवस्था कमजोर है।अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या कोपरा जलाशय को वाकई वह सुरक्षा मिल पाएगी जिसका दावा किया गया था।

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