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हर तरफ कचरे का ढेर किसकी शह पर चल रहा कचरा प्रबंधन के नाम पर खेल

गाड़ी वाला आया चल कचरा निकाल का हल्ला कचरा-कचरा हुआ हर मोहल्ला

मवेशियों के झुंड और चरमराई सफाई व्यवस्था से मंडरा रहा जनस्वस्थ्य का खतरा

बिलासपुर। 5 करोड़ 27 लाख के ठेके की मासिक सफाई और निगम अमले व संसाधन की बेगारी के बाद भी शहर गन्दा का गन्दा है। लायन्स सर्विसेज के हेड ने दावा किया था कि उनका काम शुरू होने के बाद शहर की सड़को पर कागज का एक टुकड़ा तक नही दिखेगा। दिल्ली के दो ठेका कम्पनी की सफाई और कचरा उठाव करने के दावे के बाद भी शहर में गंदगी का अम्बर भरा हुआ है। जबकि नाले नालियों की सफाई का जोन के हिसाब से ठेका है।

बता दे चुनावी साल 2013 के ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तामझाम के साथ उस समय मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह के हाथों इस सफाई ठेके की गांधी चौक से शुभारम्भ कराई थी। इसके बाद सरकार गई कांग्रेस आई फिर कांग्रेस गई भाजपा आई पर सफाई की व्यवस्था में सुधार नहीं आया।शहर की गंदगी और बदबू आज भी वैसा ही है जैसा पहले था।ऐसा नहीं है कि सफाई नहीं होती है सफाई होती है लेकिन सिर्फ दिखावे की सफाई होती है।जिसमें सफाई कर्मी सफाई कम और फोटो ज्यादा खिंचवाते है।

ये है लायंस सर्विसेज

इस ठेका फर्म का काम रोड, फुटपाथ, सड़को के बीचो बीच डिवाइडर की सफाई और धुलाई करना है। पहले कम्पनी को 2 करोड़ मासिक भुगतान किया जाता था। शहर विस्तार के बाद वार्डो की संख्या बढ़ने पर पूरे 70 वार्डो की सफाई का काम अब 4 करोड़ में इसी कम्पनी को दिया गया है।

ये है संसाधन

लायन्स सर्विसेज के प्रोजेक्ट हेड की माने तो शहर की सफाई व्यवस्था के लिए कम्पनी के पास सड़को पर झाड़ू लगाने 2 डेलेवो मशीन वाहन, फुटपाथ और डिवाइडर धोने वाली 2 जेटिंग मशीन वाले वाहन, 16 प्लेग डेक(डब्बा गाड़ी) 17 टाटा एस टिपर, 2 डाला वाली बोलेरो, 15 ट्रैक्टर ट्रॉली और साढ़े 1400 कर्मचारी होने का दावा किया जा रहा है।

एमएस डब्लयू सॉल्यूशन(रामकी)

रामकी कम्पनी के प्रोजेक्ट हेड की माने तो कम्पनी के पास डोर टू डोर कचरा संकलन के लिए 78 छोटी गाड़ियां, 12 बड़ी काम्पेक्टर मशीन, 4 हाइवा टिप्पर, 2 एक्सीवेटर, 1 रोलर, 4 ट्रोमिल, 3 जेसीबी और 1 ट्रेक्टर बुल है।

ये है कम्पनी का काम

एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन कम्पनी का काम शहर के 70 वार्डो में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, शहर के नुक्कड़ों और कंटेनरों से कचरे का संकलन कर कचरे को कछार डंपिंग यार्ड पर ले जाकर तौल और इसके बाद इसे प्रोसेस के लिए प्लांट के अंदर डंप करना है। निगम के स्वास्थ्य अधिकारी की माने तो शहर से रोज 200 तन कचरा निकलता है। कम्पनी को 2115 रुपये पर टन के हिसाब से रोजाना 4 लाख 23 हजार रुपये और महीने में 1 करोड़ 26 लाख 90 हजार रुपये भुगतान किया जाता है। लेकिन करोड़ों खर्च करने के बाद भी शहर की सफाई में फर्क नहीं आया और शहर वैसा ही है जैसे पहले था।

नगर निगम ठेके में

महापौर सभापति पार्षदो और अफसरों को छोड़ दे तो पूरा नगर निगम ठेके पर चल रहा, और कैसे चल रहा वो भी जान लीजिए शासन ने पिछले भाजपा सरकार के कार्यकाल में निकायों को डेलेवो मशीन झाड़ू वाली गाड़ियां प्रदान की थी। मशीन वाहन समेत 70-70 लाख की थी जो बिलासपुर नगर निगम को भी दो मिली थी, सड़को को सीवरेज खा गई थी। इसलिए ये मशीनें कलेक्टर, एसपी और मंत्री के बंगले, नेहरू चौक पुराना अरपा पल रोड पर चलवाई जा रही है दोनो बड़ी मशीनें थी, जिन्हें खराब होने पर लाखों खर्च कर बनवाया गया फिर भी नही बनी तो काट काटकर कबाड़ में बेचना पड़ा, वो दोनों बड़ी मशीनें थी,कम्पनी वाली तो मिनी डेलेवो है। जो 12 साल से सड़कों पर झांकी दिखा रही है।

वर्जन
निगम का अमला पहले से साफ सफाई कर चुका है।और गंदगी को लेकर लगातार सफाई करती भी है।लेकिन जनता
से भी अपील है कि कचरा डस्टबिन में डाले
सड़को और मोहल्ले गली में कचरा न फैलाए जिससे गंदगी हो।

पूजा विधानी
महापौर नगर निगम
बिलासपुर

वर्जन
ऐसा नही है, 400 कर्मचारी लगे है पर्याप्त संसाधन है, पूरे टाइम स्टाफ कचरे के उठाव में लगे रहते है, हो सकता है कि कही कंटेनर जल्दी भर जाते है, दिखवा लेता हूँ।

भास्कर दुबे,
प्रोजेक्ट हेड रामकी एसएसडब्ल्यू सॉल्यूशन
नगर निगम

वर्जन
ऐसा नही है, कम्पनी का स्टाफ लगा है, रात में सफाई और धुलाई का काम चलता है, लगातार बारिश के कारण शेड्यूल गड़बड़ाने की वजह से काम मे दिक्कत आती है, फिर भी कर रहे है।

चमन मिश्रा
प्रोजेक्ट हेड, लायंस सर्विसेज नगर निगम

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