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लक्ष्मी व्रत करने से दूर होती है दरिद्रता : गौरी शंकर प्रिया

भारत विख्यात श्री श्री गौरी शंकर प्रिया जी ने भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सनातन धर्म का प्रचार प्रसार से डंका बजाया है इसके लिए डॉ ह्रदयेश कुमार के सौजन्य से सिंगापुर से अवॉर्ड दिया गया था लेकिन अब श्री गौरी शंकर प्रिया जी ने सनातन धर्म की सभी व्रत और अन्य जानकारी को सभी लोगों को विस्तार से बता कर अभियान चला कर अपना पूर्ण रूप से मानव कल्याण के लिए लिए अपना जीवन समर्पण कर दिया है खैरा बिहार जमुई के शिव मंदिर परिसर में लक्ष्मी व्रत करने से दूर होती है दरिद्रता के विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया श्री गौरी शंकर प्रिया ने
बताया कि कहा जाता है कि ये दिन दिवाली की तरह ही मनाया जाता है, इस दिन मां लक्ष्मी की भव्य रूप से पूजा की जाती है. मान्यता है कि सावन माह के अंतिम शुक्रवार को किए जाने वाला ये व्रत कलियुग में सौभाग्य प्राप्ति की चाबी है. इसके फलस्वरूप निर्धन भी धनवान हो जाता है. वरलक्ष्मी व्रत के दिन कथा पढ़ने मात्र से सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

वरलक्ष्मी व्रत की कथा

वरलक्ष्मी व्रत कथा के अनुसार बहुत पौराणिक समय मैं मगध राज्य में कुण्डी नामक एक नगर था. यह नगर मगध राज्य के मध्य स्थापित था. इस नगर में एक ब्राह्मणी नारी चारुमति अपने परिवार के साथ रहती थी. जिस पर माता लक्ष्मी का बहुत अटूट विश्वास था. वह हर दिन माता लक्ष्मी की पूजा करती थी.
एक रात्रि में माँ लक्ष्मी ने उस महिला से प्रसन्न होकर उसे स्वप्न में दर्शन दिए और उसे वर लक्ष्मी नामक व्रत करने का सुझाव दिया और कहा इस व्रत के प्रभाव से तुम्हे मनोवांछित फल प्राप्त होगा.
अगले सुबह चारुमति ने मां लक्ष्मी के बताये गए वरलक्ष्मी व्रत को समाज की अन्य नारियों के साथ विधिवत पूजन किया. पूजन के संपन्न होने पर सभी नारियां कलश की परिक्रमा करने लगीं, परिक्रमा करते समय समस्त नारियों के शरीर विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सज गए. उनके घर भी सोने से सुसज्जित हो गए. घोड़े, हाथी, गाय आदि पशु भी आ गए. कालांतर में यह कथा भगवान शिव जी ने माता पार्वती को सुनाई थी. माता पार्वती ने भी इस व्रत को किया था

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