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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी मजदूरों को नहीं मिला हक, सालों से भटक रहे ग्रेच्युटी के लिए

श्रम विभाग से लेकर कोर्ट तक, फिर भी नहीं मिली मजदूरी की रकम

बिलासपुर ।तोरवा के पुराना पावर हाउस स्थित रिफेक्ट्री कंपनी में वर्षों तक मेहनत करने वाले आधा दर्जन से अधिक बुजुर्ग मजदूर अपनी ग्रेच्युटी की राशि के लिए एक दशक से भटक रहे हैं। कंपनी की मनमानी के चलते ये मजदूर श्रम विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनकी खून-पसीने की कमाई नहीं मिली। आखिरकार, मजदूरों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इंसाफ की मांग की, जिस पर हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि दो महीने के भीतर उनका भुगतान किया जाए। इसके बावजूद प्रशासन मजदूरों को टालमटोल कर रहा है। घनश्याम रजक ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बावजूद अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। शकुन बाई ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे 15 साल से अपने हक के लिए भटक रही हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। वहीं, सुखऊराम निषाद ने बताया कि महिला मजदूर सेठ मंगल सिंह के यहां लोहा ईंट बनाने का काम करती थीं, लेकिन कंपनी मालिक ने उनकी ग्रेच्युटी की रकम नहीं दी। अब ये मजदूर न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर हैं।मजदूरों ने न्याय की गुहार लगाकर कलेक्टर को आवेदन दिया है और मांग की है कि उनकी समस्याओं का हल निकाला जाए।अन्यथा किसी दिन हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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