विवादित जमीन से कब्जा हटाने गई प्रशासनिक टीम,किसानों ने मांगा एक सप्ताह का समय

एसडीएम के आदेश पर पहुंची टीम, ग्रामीणों ने मांगा मोहलत
किसानो ने की बिल्डर पर कार्यवाही की मांग
बिलासपुर।कोनी थाना क्षेत्र के ग्राम सेंदरी में गुरुवार को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो गई। मामला जमीन से जुड़ा हुआ है। प्रशासन की टीम कब्जा हटाने पहुंची थी, लेकिन किसानों ने इसका विरोध किया।
मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई एसडीएम मनीष साहू के निर्देश पर की जा रही थी। टीम में नायब तहसीलदार विभोर यादव, राजस्व निरीक्षक और पटवारी मौजूद थे। जैसे ही प्रशासन ने विवादित जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की, किसान मौके पर आ गए और कार्रवाई रोकने की मांग करने लगे।ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें इस बारे में पहले कोई सूचना नहीं दी गई। अचानक पहुंची टीम ने जब कब्जा हटाना शुरू किया तो उन्हें आपत्ति हुई। किसानों ने तहसीलदार के सामने गुहार लगाई कि कम से कम उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाए, ताकि वे खुद से अपना कब्जा हटा सकें। विवाद बढ़ता देख अंततः प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई और किसानों को मोहलत दे दी।दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब किसान गेंदराम साहू ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उनकी संयुक्त नाम पर दर्ज भूमि, जिसका खसरा नंबर 1307/1 और 1308 है, उस पर उन्होंने खेती कर रखी थी। लेकिन एक बिल्डर ने उनकी खड़ी फसल को जबरन पाटकर रातों-रात 50 फीट चौड़ी सड़क बना दी।
दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि एसडीएम द्वारा जो आदेश जारी किया गया था, उसमें जिन खसरा नंबरों का जिक्र है (1493/1, 1221, 1222, 1322, 1320, 1309/1 और 1229/1), वे पहले से ही स्थायी मार्ग के रूप में दर्ज हैं। इन खसरा नंबरों में किसान गेंदराम की जमीन शामिल नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर बिल्डर ने किसान की खेती वाली जमीन पर सड़क कैसे बना दी? क्या इसमें प्रशासनिक लापरवाही हुई है या फिर जानबूझकर किसानों की बात को नजरअंदाज किया गया?किसान गेंदराम साहू और उनके परिवार का कहना है कि वे अब भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका साफ कहना है कि दोषी बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उनकी जमीन वापस उन्हें मिलनी चाहिए।इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं