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विवादित हॉस्टल अधीक्षक पर भ्रष्टाचार, छात्रों के हक में घोटाले के गंभीर आरोप,तत्काल हटाने और नियमित अधीक्षक की पदस्थापना की मांग तेज

विवादित अधीक्षक पर गंभीर आरोप, हटाकर नियमित अधीक्षक की पदस्थापना की मांग

कोटमी कला छात्रावास में भ्रष्टाचार का मामला

बिलासपुर/गौरेला पेंड्रा मरवाही-विकासखंड पेंड्रा के शासकीय बालक छात्रावास कोटमी कला में पदस्थ विवादित हॉस्टल अधीक्षक शंकर प्रजापति के खिलाफ भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों को शिकायत सौंपते हुए अधीक्षक को तत्काल पद से हटाने और उनके स्थान पर नियमित अधीक्षक की पदस्थापना करने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शंकर प्रजापति पहले भी कई विवादों और भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें दोबारा हॉस्टल अधीक्षक के पद पर नियुक्त करना विभागीय नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। यह नियुक्ति न केवल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करती है बल्कि छात्रों के हितों के साथ खिलवाड़ करने के समान है।

खाद्यान में अनियमितताएं और छात्रों के हक का हनन
छात्रावास में आने वाले चावल में गड़बड़ी और उसे बेचना जैसे आरोप पहले भी लग चुके हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गरीब छात्रों के लिए आने वाला खाद्यान सही तरीके से नहीं दिया जा रहा और इसका कुछ हिस्सा गलत तरीके से बेचा जा रहा है। यह सीधे छात्रों के हक का हनन है और छात्रावास की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शासकीय भूमि में कथित हेरफेर
अधीक्षक पर दस्तावेजों में कथित फर्जीवाड़ा कर शासकीय जमीन अपने नाम दर्ज कराने और उसका डायवर्शन कराने का गंभीर आरोप लगाया गया है। यह मामला न केवल अनियमितता का है, बल्कि आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे विभाग की प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान हो रहा है।

नियुक्तियों में कथित रिश्वतखोरी
छात्रावास में रसोइया की नियुक्ति के नाम पर वसूली की कई शिकायतें सामने आई हैं। बताया गया है कि इस प्रक्रिया में 1 लाख से 1.50 लाख रुपये तक की राशि की वसूली की गई, जो सीधे भ्रष्टाचार को उजागर करती है। शिकायतकर्ताओं ने इसे छात्रों और कर्मचारियों के साथ अन्याय बताया है।

पूर्व विवादित स्थिति के बावजूद पुनः नियुक्ति
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि शंकर प्रजापति को पहले ही विवादित बताया जा चुका था, इसके बावजूद उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दी गई। यह कदम विभागीय नियमों और प्रशासनिक नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और उच्च स्तर की मिलीभगत की आशंका को भी बढ़ाता है।

मांगें और कार्रवाई की अपेक्षा
शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि शंकर प्रजापति को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल अधीक्षक पद से हटाया जाए और उनके स्थान पर नियमित अधीक्षक को पदस्थ किया जाए। साथ ही पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जिससे छात्रावास की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह देखना बाकी है कि विभागीय प्रशासन इस मामले में किस तरह की कार्रवाई करता है और छात्रावास में चल रहे भ्रष्टाचार पर कितनी जल्दी रोक लगाई जाती है।

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