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शिक्षा व्यवस्था का ऐसा बुरा हाल प्रधान पाठक से लेकर शिक्षकों तक को नहीं पता प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के राष्ट्रपति का नाम, सामान्य स्पेलिंग भी नहीं लिख पाए

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति सामने आई है। यहां बच्चे तो क्या शिक्षक और प्रधान पाठक भी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का नाम तक नहीं बता पाए । इसके अलावा अंग्रेजी संख्या के सामान्य शब्द भी नहीं लिख पाए। जिले के कलेक्टर– एसपी भी नाम शिक्षकों को नहीं पता।

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के शासकीय स्कूल से शिक्षा व्यवस्था की लचर व्यवस्था सामने आई है। यहां सरकारी स्कूल के प्रधान पाठक से लेकर शिक्षकों को देश के राष्ट्रपति से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिले के कलेक्टर और एसपी का नाम तक नहीं पता। यहां तक कि इलेवन, एटीएन, नाइटीन की सामान्य स्पेलिंग भी शिक्षक सही नहीं लिख पाए। वायरल वीडियो से सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है और मासूम बच्चों का भविष्य ऐसे शिक्षकों के हाथों में किस तरह घने अंधेरे की गर्त में जा रहा है यह भी दिख गया है।

पूरा मामला बलरामपुर रामानुजगंज ज़िले के कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत मड़वा अंतर्गत स्थित प्राथमिक शाला घोड़ासोत का है, जहाँ शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता शून्य के बराबर पाई गई।

बच्चों से पूछा गया, मगर कोई जवाब नहीं:–

यहां कुछ मीडियाकर्मी स्कूल पहुंचे और पहले बच्चों से कुछ सामान्य सवाल पूछे। पर बच्चे भारत के प्रधानमंत्री का नाम, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं बता पाए।

शिक्षकों को भी नहीं जानकारी:–

स्कूल में सबसे हैरान करने वाला दृश्य तब सामने आया, जब वहीं मौजूद दो शिक्षक और प्रधान पाठक भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का, देश के राष्ट्रपति देश के शिक्षा मंत्री और छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री समेत बलरामपुर जिले के कलेक्टर और एसपी का नाम नहीं बता पाए।

सामान्य स्पेलिंग भी नहीं लिख पाए प्रधान पाठक और शिक्षक:–

शिक्षकों से बच्चों को अंग्रेजी में ‘Eleven’, ‘Eighteen’, ‘Nineteen’ की स्पेलिंग लिख कर पढ़ाने को कहा गया, तो तीनों शिक्षक खुद ही गलत स्पेलिंग लिख बैठे। प्राथमिक स्तर की कक्षा के सामान्य शब्द भी शिक्षक नहीं लिख पाए। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह देश का भविष्य गढ़ने वाले बच्चों को किस तरह पढ़ा रहे होंगे।

जिले की प्राथमिक शिक्षा और शिक्षा व्यवस्था के सिस्टम पर प्रश्न चिन्ह लगाने वाली तस्वीर:–

इस घटना ने न सिर्फ स्कूल या शिक्षकों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि जिले में शासकीय विद्यालयों की निगरानी पूरी तरह लचर है। यहां शिक्षा विभाग के अधिकारी और मॉनिटरिंग करने वाले अफसर भी जिम्मेदारियां निभाने में अधिकारी असफल हैं।इस दिशा में अधिकारियों द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जा रहे हैं।

डीईओ ने जांच के बाद दिया कार्यवाही का आश्वासन:–

इस शर्मनाक मामले पर जब मीडियाकर्मियों ने बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी से बात की, तो उन्होंने जांच कर उचित कार्यवाही की बात कही है।

लेकिन सवाल है कि क्या यह कार्यवाही केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगी? क्योंकि यह मामला अकेले एक गांव का नहीं है — यह एक व्यापक शैक्षणिक संकट की बानगी है। यह स्थिति न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी एक गंभीर खतरे की घंटी है।

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