शिवरीनारायण में भू माफियाओं की गिद्ध दृष्टि, सरकारी, निजी हर जमीन को बना रहे है विवादित

शिवरीनारायण। छत्तीसगढ़ की प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी शिवरीनारायण भू माफियाओं का अखाड़ा बना हुआ है। निजी और सरकारों जमीन को हथियाने के लिए हर जगह विवाद खड़ा कर रहे है। भू माफियाओं के इस गुणाभाग के कारण पूरे शिवरीनायरण नगर में भय और आक्रोश का माहौल है। जमीन विवाद के कारण नगर अंदर ही अंदर सुलग रहा है और यहां निकट भविष्य में नर संहार हो जाए तो आश्चर्य नहीं है।
शिवरीनारायण की लगभग निन्यानबे प्रतिशत जमीन में आज विवाद की स्थिति निर्मित हो चुकी है। चाहे सरकारी भूमि हो, निजी भूमि, सेवा भूमि अथवा बाग या घास भूमि, पीएम योजना के तहत आवास या अन्य योजना की पट्टे की भूमि- आवास, कोटवारी अथवा आबादी भूमि ही क्यों न हो। इन पर भू-माफियाओं के नज़रे लगी हुई है और इन जमीन हड़पने-हथियाने किसी भी हद तक जा सकते हैं। इनके द्वारा लोगों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन, मारपीट अथवा एससी-एसटी एक्ट व छेड़छाड़ और बलात्कार की प्रकरण में फसाने, तथा जान से मारने की धमकी आम बात हो गई है। छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रांत के पर्यटक यात्रियों के साथ ही यहां रायपुर, बिलासपुर, सारंगढ़ बलौदा-बाजार जांजगीर के मध्य में होने से यहां यात्री-सैलानियों की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है। सीजनल वस्तुओं के खरीदारी के लिए काफी दूर-दूर से लोग यहां प्रतिदिन आते रहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थल भी बन चुका है। यहां ज्वेलरी, ब्रांडेड कपड़ों की दर्जनों दुकानें, कई दो पहिया और चार पहिया वाहनो के शो रूम खुल चुके है। लगभग 40 किलोमीटर की परिधि में यह सबसे बड़ा व्यापारिक स्थल बन चुका है। यही कारण है कि यहां जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच गई है। ऊंची पहुंच रखने वालों की नजरें यहां की जमीनों पर टिक गई है। ये भू माफिया- जमीन दलाल विवादित भूमि को भी नहीं छोड़ रहे है। जिस जमीन में कोई विवाद नहीं है उसे भी विवादित बनकर हथियाने की कोशिश कर रहे है। अभी हाल हो में यहां एक ताजा मामला सामने आया है। जिसमें रितेश विरुद्ध हेमंत कुमार शर्मा वगैरह शिवरीनारायण अपीलीय प्रकरण क्रमांक 29 अ/2018 निर्णय डिक्री दिनांक 22/6/2018 निष्पादित हुआ है। नगर के एक युवक हेमंत शर्मा ने बताया की राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा इसका विधिवत परिपालन न होने और निर्णय डिक्री के विरुद्ध होने से त्रस्त हम लोग कूट रचना और धोखा धडी का शिकार होकर अपनी बेशकीमती जमीन जो करोड़ो का है महज कुछ छोटी राशि में रजिस्ट्री कर बैठे। हेंमत का कहना है कि क्रेता ऐसी भूमि को बकायदा राजस्व पंजीयक कार्यालय और स्थानीय पुलिस को संलिप्त कर कार्य को अंजाम देते हैं। इसकी शिकायत होने पर संबंधित अधिकारी अनदेखा कर रहे है। प्रताड़ित पक्षकार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर होते है। अधिकारियों से मिली भगत कर व इन भ्रष्ट व्यवस्था के चलते भू-माफियाओं की पकड़ इतनी गहरी है कि जमीन रजिस्ट्री व पॉवर ऑफ अटर्नी की दस्तावेज और तिथि तक लॉक करा देते है। एक तरफ राज्य सरकार सुशासन त्यौहार मनाने जगह-जगह चौपाल लगा रही है वही दूसरी तरफ भ्रष्ट अधिकारियों की संलिप्तता से भू- माफियाओं का वर्ग मालामाल हो रहे हैं और कमजोर पक्षकार दहशत में है और दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। इन परिस्थितियों में प्रदेश के मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों द्वारा प्रदेश की जनता को दिये जाने वाले भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की बात मंचों और मीडिया तक सिमट कर रह गई है। यदि समय रहते अधिकारी वर्ग जन शिकायतों का निराकरण नहीं करेंगे? और सरकार द्वारा शिकायत के निराकरण का समय सीमा निश्चित नहीं की जाती? तो जनमानस में सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिन्ह भी उठना लाजिमी है।
उक्त प्रकरण में निर्णय डिक्री होने और अवैध बटांकन पर आपत्ति होने के बावजूद पंजीयन कार्यालय में रजिस्ट्री होना पंजीयन विभाग के अधिकारियों का भ्रष्टाचार में संलिप्त स्वयं बयान करता है। इसी व्यवस्था में जीने जनता ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव- 2023 में क्या सरकार परिवर्तन का विकल्प चुना था ?
कुछ यक्ष प्रश्न क्षेत्र वासियों के दिलों- दिमाग में कुतेर रही है कि क्या शासन ऐसे कूट रचना करने वाले अधिकारी- कर्मचारियों तथा अवैध बटांकन करने वाले राजस्व के अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करेगी? उन्हें उनकी सेवा से बर्खास्त करेगी? राजस्व पंजीयन कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ें समाप्त करेंगी? भू-माफियाओं पर नकेल कसेंगी या ऐसी मालामाल के लिए उन्हें छोड़ देगी ? नागरिकों ने मुख्यमंत्री से इस प्रकरण में कूट रचना करने वालों पर कठोर कार्यवाही करने तथा अवैध बटांकन पर हुई जमीन की रजिस्ट्री शुन्य करने की मांग करते हुए इस कार्य में संलिप्त राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की मांग की है।
साथ ही नगर पंचायत शिवरीनारायण के अध्यक्ष राहुल थवाईत तथा सीएमओ व अन्य संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों से भी यह अपेक्षा की है कि नगर पंचायत को पक्षकारों से नामांतरण हेतु प्राप्त आवेदन पत्रों में संलग्न दस्तावेजों का सूक्ष्मता से अवलोकन कर राजस्व विभाग के अधिकारियों का अभिमत लेकर जमीन, मकानों-दुकानों की विक्रय अभिलेख तथा नोटरी अभिलेख को दृष्टिगत रखते हुए मौके-मुआयना कर पारदर्शिता के साथ नामांतरण कार्यवाही किया जाए। ताकि कोई विवाद की स्थिति निर्मित न हो।