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शैक्षणिक भ्रमण से कृषि छात्रों को मिला व्यवहारिक ज्ञान का अनुपम अवसर

रायपुर, 14 जुलाई 2025 – छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि शिक्षा को व्यवहारिक अनुभवों से जोड़ने तथा छात्रों को कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र में नवीनतम शोध एवं तकनीकी नवाचारों से रूबरू कराने के उद्देश्य से बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर और कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के बी.एससी. (कृषि) तृतीय वर्ष के 55 छात्र-छात्राओं का एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण रायपुर में आयोजित किया गया।

यह भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम AHPD-5321 (शैक्षणिक भ्रमण) के अंतर्गत किया गया। भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को कृषि अनुसंधान, जैविक तनाव प्रबंधन, उच्च तकनीकी प्रयोगशालाओं और कृषि से जुड़े व्यावसायिक अवसरों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था। भ्रमण दल का नेतृत्व डॉ. राजेश कुमार साहू, प्राध्यापक (कृषि विस्तार) एवं डॉ. (श्रीमती) अर्चना केरकेट्टा, सह-प्राध्यापक (कीट विज्ञान) ने किया।

भ्रमण के प्रमुख पड़ाव और अवलोकन

राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (NIASM), रायपुर

यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन कार्यरत है और फसल उत्पादन पर जैविक तनावों जैसे कीट, रोग, सूखा एवं लवणता से निपटने के लिए नवीनतम शोध करता है।
विद्यार्थियों ने निम्न सुविधाओं का अवलोकन किया:

  • नियंत्रित वातावरण कक्ष (Controlled Environment Chambers)
  • कीट संग्रहालय
  • जैविक निदान प्रयोगशालाएँ (Diagnostic Labs)
  • बायोटेक्नोलॉजी आधारित जैव-नियंत्रण तकनीकों का प्रदर्शन

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर

छात्रों ने विश्वविद्यालय में कई अत्याधुनिक शोध इकाइयों एवं शैक्षणिक संरचनाओं का अवलोकन किया, जिनमें प्रमुख हैं:

  • आर.एच. रिछारिया रिसर्च लैबोरेट्री: यह प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों एवं आनुवंशिक विविधता के संरक्षण हेतु कार्य करती है।
  • बायोकन्ट्रोल प्रयोगशाला: यहां छात्रों को ट्राइकोडर्मा, बीटी, पीएसबी इत्यादि जैव नियंत्रकों की उत्पादन प्रक्रिया और उनके प्रयोग की जानकारी मिली।
  • कृषि म्यूजियम: एक आकर्षक स्थल जहां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कृषि पद्धतियों, औजारों, बीजों और फसल विविधता को संजोया गया है।
  • बीज उत्पादन इकाई और मृदा परीक्षण प्रयोगशाला: छात्रों ने बीज शुद्धता परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य विश्लेषण एवं उर्वरक अनुशंसा प्रक्रिया को देखा।
  • पादप प्रजनन एवं आनुवंशिकी विभाग: यहां हाइब्रिड बीज विकास की तकनीकों, चयन विधियों और क्रॉसिंग ब्लॉक का अवलोकन किया गया।

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक एवं आधुनिक कृषि विधियों, सतत कृषि प्रणाली और किसान हितैषी नवाचारों जैसे एग्रो-स्मार्ट फार्मिंग, ड्रोन आधारित खेती, और डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म के बारे में जानकारी दी।

महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, रायपुर

यहाँ छात्रों ने व्यावसायिक उद्यानिकी और वानिकी अनुसंधान की अत्याधुनिक इकाइयों का दौरा किया।

विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया और अनुभव

छात्रों ने इस भ्रमण को “शैक्षणिक जीवन की एक अविस्मरणीय उपलब्धि” बताया। उन्हें जहां अपने पाठ्यक्रम की संकल्पनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव मिला, वहीं शोध एवं कृषि व्यवसाय के नए दृष्टिकोणों की भी झलक मिली।

प्रशिक्षकों और संस्थानों की सराहना

डॉ. राजेश कुमार साहू और डॉ. अर्चना केरकेट्टा ने इस भ्रमण की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों में नवाचार की भावना जगाते हैं और उन्हें कृषि के बदलते स्वरूप के लिए तैयार करते हैं।”

सभी संस्थानों के प्रमुखों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासा, अनुशासन और व्यवहार की सराहना की तथा भविष्य में ऐसे और शैक्षणिक सहयोग की उम्मीद जताई।

यह शैक्षणिक भ्रमण न केवल छात्रों के शैक्षणिक विकास में सहायक रहा, बल्कि उनके व्यावसायिक दृष्टिकोण, प्रायोगिक कौशल और समग्र व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक प्रभावशाली कदम सिद्ध हुआ।

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