शैक्षणिक भ्रमण – हैदराबाद में कृषि छात्रों ने किया ICRISAT का शैक्षणिक अवलोकन, कृषि अनुसंधान की नवीनतम तकनीकों से हुए रूबरू

बिलासपुर/हैदराबाद – छत्तीसगढ़ की कृषि शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से समृद्ध करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के बी.एससी. (कृषि) तृतीय वर्ष के 45 छात्र-छात्राओं ने हैदराबाद, तेलंगाना में पांच दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण की शुरुआत की। यह भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम AHPD-5321 के अंतर्गत आयोजित किया गया है।

भ्रमण दल का नेतृत्व:
विद्यार्थियों के इस शैक्षणिक दल का नेतृत्व डॉ. दिनेश पांडे, वैज्ञानिक (सस्य विज्ञान), डॉ. (श्रीमती) पुष्पलता तिर्की, वैज्ञानिक (उद्यानिकी) एवं डॉ. अवनीत कुमार, वैज्ञानिक (अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन) कर रहे हैं। तीनों ही शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में छात्र-छात्राएं देश के अग्रणी कृषि अनुसंधान संस्थानों और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं, जिससे उन्हें न केवल व्यावहारिक ज्ञान मिल रहा है बल्कि कृषि नवाचारों की मौजूदा दिशा का भी सजीव अनुभव हो रहा है।

ICRISAT का शैक्षणिक अवलोकन:
शैक्षणिक भ्रमण के दूसरे दिन विद्यार्थियों ने विश्व प्रसिद्ध अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) का भ्रमण किया। यह संस्थान विश्व के 70 से अधिक देशों के किसानों की आजीविका सुधारने हेतु जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों और फसलों के विकास हेतु कार्यरत है।

छात्र-छात्राओं ने ICRISAT में:
सूखा प्रतिरोधी फसल प्रजातियों (जैसे कि ज्वार, बाजरा, चना, अरहर आदि) की उन्नत किस्मों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।
सटीक कृषि (Precision Agriculture), जल प्रबंधन, एवं कृषि जैव प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
संस्थान में चल रहे नवीन अनुसंधान परियोजनाओं, जीन बैंक, क्लाइमेट स्मार्ट लैब, और इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का गहन अध्ययन किया।
इस अवसर पर छात्रों एवं शिक्षकों ने ICRISAT के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक से शिष्टाचार भेंट की, जिन्होंने संस्थान की वैश्विक भूमिका, अनुसंधान दिशा, और कृषि में नवाचार की महत्ता पर विस्तृत चर्चा की।
सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्थलों का भ्रमण:
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने हैदराबाद के प्रमुख ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक स्थलों का भी अवलोकन किया, जिनमें शामिल हैं:
बिरला मंदिर – आधुनिक वास्तुकला और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक।
गोलकोंडा किला – हैदराबाद की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का परिचायक।
बीएम बिरला साइंस सेंटर – विज्ञान के विभिन्न आयामों को रोचक और इंटरेक्टिव तरीकों से प्रस्तुत करता है।
हुसैन सागर – एक ऐतिहासिक और दर्शनीय कृत्रिम झील है, जो 1562‑63 में कुतुब शाह वंश के दौरान बनवाई गई थी । यह झील रंगीन “दिल” आकार की है और हैदराबाद व सिकंदराबाद को जोड़ती है ।
इस भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि के अलावा सामाजिक, ऐतिहासिक और तकनीकी दृष्टिकोण से भी व्यापक जानकारी प्राप्त हो रही है।
छात्रों की प्रतिक्रिया:
छात्रों ने इस शैक्षणिक भ्रमण को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के दौरे उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण, करियर विकल्पों की समझ, और नवाचार में रुचि को प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही, उन्हें ICRISAT जैसे वैश्विक संस्थानों में काम करने के अवसरों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हुई।
यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक सिद्ध हो रहा है और उन्हें भारत की अग्रणी कृषि शोध व्यवस्थाओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहा है।