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फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रकरण में नया मोड़, छात्राओं ने कहा तहसील से ही जारी हुआ प्रमाण पत्र, तहसील की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बिलासपुर ।फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जिन छात्राओं का ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी हुआ था उनके और उनके परिजनों के अनुसार विधिवत तहसील में आवेदन देने के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत उन्हें प्रमाण पत्र जारी हुए थे। छात्राओं और उनके परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो यह तहसील स्तर पर हुई होगी। तीनों छात्राओं ने इस संबंध में तहसील पहुंचकर बयान दर्ज करवाया है। छात्राओं के बयान के बाद तहसील दफ्तर की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है और वहां की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है।

मेडिकल प्रवेश के लिए जारी फर्जी ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र कांड ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। तहसीलदार के समक्ष पेश होकर तीनों आवेदकों और उनके परिजनों ने बयान दर्ज कराए। उनका कहना है कि प्रमाणपत्र उन्होंने नियमित प्रक्रिया के तहत हासिल किया था। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद प्रमाणपत्र तहसील कार्यालय से ही जारी हुआ था। उन्होंने साफ कहा कि सील और हस्ताक्षर की विसंगति से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

तहसीलदार ने आवेदकों से सभी मूल दस्तावेज पेश कराए और बारीकी से जांच की। इस दौरान परिजनों ने स्पष्ट किया कि यदि सील या हस्ताक्षर में कोई गड़बड़ी है तो वह कार्यालय के भीतर की हेराफेरी है, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर यह बड़ा सवाल उभर रहा है कि जब आवेदन ऑनलाइन दर्ज था तो उसकी फाइल तहसील रिकॉर्ड में क्यों नहीं मिली। फिलहाल जांच समिति ऑनलाइन डाटा और तहसील फाइलों का मिलान कर रही है।

तहसील में गिरोह सक्रिय होने की आशंका:–

जांच की शुरुआती रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि तहसील कार्यालय के भीतर संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है। प्रमाणपत्र पर अलग-अलग सील और हस्ताक्षर की मौजूदगी यह साबित करती है कि फर्जीवाड़े की जड़ें गहरी हैं। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि किन कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल अंजाम दिया गया। सूत्रों का कहना है कि जांच की आंच बड़े अधिकारियों तक भी पहुंच सकती है।

रीडर पर गहराया संदेह:–

पूरे मामले में तहसील कार्यालय के रीडर की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। जांच समिति ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आशंका है कि आवेदन और दस्तावेजों की हेराफेरी इसी स्तर पर हुई। उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उसके बयान भी जल्द दर्ज किए जाएंगे।

रिकॉर्ड सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल:–

ऑनलाइन आवेदन दर्ज होने के बावजूद तहसील कार्यालय में फाइलें न मिलना, रिकॉर्ड प्रबंधन की खामियों को उजागर करता है। यदि आवेदन वैध तरीके से जमा हुआ था तो उसका रिकॉर्ड गायब कैसे हुआ? इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि डिजिटल और कागजी रिकार्ड में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई। अब जब मामला सार्वजनिक हो गया है तो रिकॉर्ड को “सही” करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

पूरा घटनाक्रम:–

शैक्षणिक सत्र 2025-26 में मेडिकल प्रवेश हेतु तीन छात्रों ने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र लगाया था। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त कार्यालय, रायपुर ने सात विद्यार्थियों के दस्तावेजों को सत्यापन के लिए भेजा था। जांच में पाया गया कि तीन छात्राओं के आवेदन तहसील रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे। इसके बाद विवाद गहराया और कलेक्टर के निर्देश पर आवेदकों के बयान दर्ज किए गए।

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