समय से पहले स्कूल की छुट्टी कर स्कूल में ताला बंद…..शिक्षा के अधिकार कानून की धज्जियाँ उड़ा गया…..मनमौजी CAC भी अपने कार्यक्षेत्र से नदारद…..

जिले में कई स्कूल से शिक्षक गायब,कही लेटलतीफी से पहुंच रहे स्कूल कही पर समय से पहले हुए गायब
बिलासपुर। एक तरफ छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव राजधानी में शपथ लेकर अधिकारियों के साथ अपनी होने वाली पहली बैठक में साफ तौर से कह रहे थे कि CAC अर्थात शैक्षिक संकुल समन्वयक को अपने स्कूल में पढ़ाना होगा। वहीं दूसरी ओर न्यायधानी बिलासपुर विकास खण्ड बिल्हा अंतर्गत संचालित लोफन्दी CAC के अपने स्कूल में नहीं पढ़ाए जाने की जानकारी छात्र दे रहे थे वहीं CAC के कार्यक्षेत्र का एक प्राथमिक शाला, समय के पहले बंद होकर शिक्षा संहिता और मंत्री जी के द्वारा दिए गए निर्देश का मजाक उड़ा रहा था। क्योंकि उन्हें रोकने और उस पर अंकुश लगाने व फटकार लगाने वाले तमाम जिम्मेदार कुम्भकर्णीय नींद में थे।

समय से पहले बंद स्कूल
जी हाँ न्यायधानी के नाम से विख्यात बिलासपुर जिले एवं एशिया के सबसे बड़े बिल्हा विकास खण्ड शिक्षा कार्यालय अंतर्गत संचालित संकुल केंद्र लोफन्दी के शास प्राथमिक शाला रामनगर कछार का प्रधान पाठक सदाराम मरावी दिन सोमवार 25 अगस्त को समय से पहले स्कूल की छुट्टी कर स्कूल में ताला बंद कर शिक्षा के अधिकार कानून की धज्जियाँ उड़ा गया, क्योंकि मनमौजी CAC भी अपने कार्यक्षेत्र से नदारद हो गया था।

मजे और आश्चर्य की बात यह कि शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला लोफन्दी में 2008 से पदस्थ CAC दिलेश्वर प्रसाद कंगण खुद अपने ही स्कूल में 20 अगस्त के बाद स्कूल नहीं आए ऐसी जानकारी स्कूल में रखे पाठ्यांक देखने से हुई, उस पर ना CAC के हस्ताक्षर थे ना प्रधान पाठक द्वारा अनुपस्थित किया गया था, ना ही नियमानुसार CL चढ़ाई गई थी, क्यों? वहीं बच्चों नें बतलाया कि कंगण सर कभी भी उन्हें कक्षा में पढ़ाते नहीं हैं। जबकि नियमानुसार CAC को अपने शाला में 3 पीरियड बच्चों को पढ़ाना होता है।क्या प्रधान पाठक ने इस लापरवाही के लिए CAC को कारण बतलाओ नोटिस या संकुल प्राचार्य को पत्र लिखा, जानकारी दी? अब ऐसे में शिक्षा मंत्री जी के आदेश का क्या होगा यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है?

सवाल यह कि शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला लोफन्दी के ललित कुमार देवांगन प्रभारी प्रधान पाठक का अपने पदीय दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करनें की वजह से CAC का हौसला बढ़ाने जैसा काम बेखौफ कर रहे है।

वहीं स्थानीय शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्तों पर निष्पक्ष जाँच कराए जाने की बात कही है, वहीं संकुल प्राचार्य भी सवालों के घेरे में है।

ऐसे में सरकार सहित शिक्षा विभाग के तमाम ज़िम्मेदारों को सोचना होगा कि कमजोर आर्थिक वर्ग के बच्चों को बेहतर भविष्य व बेहतर शिक्षा के माध्यम से उनका उज्जवल भविष्य निर्माण का सरकारी दावा, कैसे पूरा होगा!

कर्मचारियों द्वारा पदीय दायित्वों के निर्वहन में बरती गई लापरवाही उजागर होने के बाद जिम्मेदार क्या जाँच जैसा कुछ ठोस कदम उठाएंगे, देखना होगा!