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सात संकुल समन्वयकों का इस्तीफा मंजूर, होगी लेखा-जोखा की भी जांच

कलेक्टर ने दी त्यागपत्र को स्वीकृति, शिक्षा विभाग में मची खलबली

कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों और वित्तीय रिकार्ड की होगी विस्तृत जांच

बिलासपुर।जिले के शहरी क्षेत्र में कार्यरत सात संकुल समन्वयकों द्वारा दिए गए इस्तीफे को कलेक्टर कार्यालय ने मंजूरी दे दी है। व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर पद छोड़ने वाले इन समन्वयकों की मुश्किलें अब बढ़ सकती हैं, क्योंकि कलेक्टर ने सीईओ को इस्तीफा मंजूर करने के साथ ही इनके कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों के आडिट और लेखा-जोखा की जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।

शहरी क्षेत्र में पदस्थ सात संकुल समन्वयक इनमें मनोज सिंह बिजौर, विकास साहू कुदुदण्ड, योगेंद्र वर्मा मोपका, शेषमणी कुशवाहा चांटिडीह, आशिष वर्मा सिरगिट्टी, प्रभात कुमार मिश्रा तारबाहर और श्रीकांत भगत दयालबंद ने स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं का हवाला देते हुए अपने-अपने पदो से इस्तीफा समग्र शिक्षा विभाग के डीएमसी ओम पांडेय को सौंपा था। शुरुआत में विभाग इन्हें उच्चाधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया था, सातो संकुल समंव्यकों का कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सभी के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। कलेक्टर ने इस्तीफा स्वीकार करने के साथ ही जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल को निर्देश दिए है कि सातों समन्वयकों के कार्यकाल के दौरान संकुल केंद्रों में हुए प्रशासनिक कार्यों और वित्तीय लेन-देन की सूक्ष्मता से जांच की जाएगी। जांच का उद्देश्य यह जानना है कि पद छोड़ने से पहले संकुल स्तर पर सभी दायित्वों का निर्वहन पारदर्शिता के साथ किया गया है या नहीं। अचानक एक साथ आए इन इस्तीफों के पीछे कहीं कोई विभागीय दबाव या अनियमितता तो नहीं, जांच का केंद्र यह भी रहेगा। फिलहाल, इन शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना शिक्षण कार्य पर वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि उनकी जगह नए समन्वयकों की नियुक्ति को लेकर मंथन जारी है।

स्वास्थ्य कारणों से मांगी थी विदाई

त्यागपत्र देने वाले समन्वयकों ने अपने आवेदन में गिरते स्वास्थ्य और पारिवारिक व्यस्तताओं को मुख्य कारण बताया था। उनका तर्क था कि वे अब प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बजाय केवल शिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। हालांकि, एक साथ सात इस्तीफों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

जांच के दायरे में आया कार्यकाल

कलेक्टर कार्यालय से मिली मंजूरी के बाद अब इन समन्वयकों के रिकार्ड खंगाले जाएंगे। विशेष रूप से संकुलों को आवंटित बजट, विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन के लेखा-जोखा की जांच की जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बिजौर संकुल समंव्यक पर भष्ट्राचार का गंभीर आरोप

बिजौर संकुल समंव्यक मनोज सिंह पर परिवहन के नाम पर लाखो के घोटाले का आरोप है जिसकी जांच के लिए पहले से ही तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। मनोज सिंह पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व प्राचार्य के साथ मिलकर बाइक को पिकअप व आटो बता कर लाखो रुपए की बंदरबांट की है।

वर्जन
कलेक्टर कार्यालय से सातों संकुल समन्वयकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं। इसके साथ ही इन समन्वयकों के कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों और फाइलों की जांच का आदेश भी मिला है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

ओम पाण्डेय, डीएमसी, समग्र शिक्षा विभाग

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