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सावधान! कहीं आपकी भी ‘बाई’ न हो जाए हड़ताल पर….बिलासपुर में घरेलू सहायिकाओं का हल्ला बोल…..महीने में 3 छुट्टी और सैलरी में बढ़ोत्तरी वरना बर्तन रहेंगे गंदे

विजयापुरम की 400 से अधिक महिलाओं ने दी चेतावनी

बिलासपुर।अगर आपके घर की सुबह भी ‘बाई’ की घंटी से शुरू होती है, तो यह खबर आपके लिए एक चेतावनी है। बिलासपुर की पॉश विजयापुरम कॉलोनी से एक ऐसी खबर आई है जो शहर के रईस परिवारों की नींद उड़ा सकती है। यहाँ रसोई और साफ-सफाई की कमान संभालने वाली करीब 422 महिलाओं ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। झाड़ू-पोछा और खाना बनाने वाली इन महिलाओं ने साफ कह दिया है कि अब पुराने वेतन और बिना छुट्टी के वे काम नहीं करेंगी। अपनी मांगों को लेकर ये महिलाएं अब सड़कों पर उतर आई हैं, जिससे कॉलोनी के घरों में ‘किचन पॉलिटिक्स’ शुरू होने के आसार बढ़ गए हैं..

दरअसल घर-घर जाकर सेवाएं देने वाली इन महिलाओं के तेवर अब पूरी तरह बदल चुके हैं। विजयापुरम कॉलोनी के 400 से अधिक घरों का कामकाज संभालने वाली इन श्रमिकों ने सामूहिक रूप से वेतन बढ़ोतरी की मांग बुलंद की है। अपमान और उपेक्षा की शिकार इन महिलाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ‘काम करने वाली मशीन’ नहीं बल्कि ‘इंसान’ हैं। बढ़ती महंगाई ने इनके घर का बजट बिगाड़ दिया है, जिससे अब पुराने वेतन पर काम करना नामुमकिन हो गया है। इन महिलाओं ने दो-टूक कहा है कि उन्हें भी सम्मानजनक मजदूरी चाहिए, ताकि वे अपने परिवार का पेट पाल सकें।अब जरा सोचिए, अगर ये महिलाएं सामूहिक हड़ताल पर चली गईं तो क्या होगा? घरों के सिंक बर्तनों से भर जाएंगे, कमरों में धूल की परत जमेगी और खाना बनाने की जिम्मेदारी खुद घर की महिलाओं पर आ जाएगी। इससे न केवल घर का मैनेजमेंट बिगड़ेगा, बल्कि काम के बोझ से पति-पत्नी के बीच झगड़े भी शुरू हो सकते हैं। आंदोलनकारी महिलाओं ने वेतन वृद्धि के साथ महीने में तीन अनिवार्य छुट्टियों की मांग रखी है। उनका कहना है कि बिना साप्ताहिक अवकाश के वे शारीरिक रूप से टूट रही हैं। अब गेंद मकान मालिकों के पाले में है—या तो मांगें मानिए या फिर खुद झाड़ू उठाने के लिए तैयार हो जाइए.।

शॉर्टकट बंद होने से बिगड़ा समय का गणित

बिलासपुर शहर की पॉश कॉलोनी विजयपुरम में घरों में झाड़ू-पोछा, बर्तन और खाना बनाने का काम करने वाली करीब 422 श्रमिक महिलाओं ने अब अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन और कॉलोनी वासियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं का आरोप है कि पिछले 15-20 वर्षों से वे जिस पिछले रास्ते का इस्तेमाल शॉर्टकट के रूप में कर रही थीं, वहां नई कॉलोनी का निर्माण होने के कारण उस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

विलम्ब से पहुंचने पर चिल्लाते है मकान मालिक

श्रमिक महिलाओं का कहना है कि देरी से पहुँचने पर मकान मालिक उन पर चिल्लाते हैं और ऑफिस जाने की जल्दी में उन्हें खरी-खोटी सुनाई जाती है। कई महिलाएं 5 से 8 किलोमीटर दूर से काम करने आती हैं, ऐसे में समय की बर्बादी उनके अन्य घरों के काम को भी प्रभावित कर रही है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि विजयपुरम के पिछले हिस्से से उन्हें पुराना रास्ता दोबारा दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने अपनी आर्थिक सुरक्षा और अधिकारों का हवाला देते हुए मकान मालिकों के सामने नई शर्तें रख दी हैं।

वेतन में तत्काल वृद्धि की जाए और उन्हें महीने में कम से कम तीन अनिवार्य छुट्टियां दी जाएं

महिलाओं की मांग है कि महंगाई को देखते हुए उनके वेतन में तत्काल वृद्धि की जाए और उन्हें महीने में कम से कम तीन अनिवार्य छुट्टियां दी जाएं, ताकि वे अपने परिवार और स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो उन्होंने सामूहिक रूप से काम बंद करने की चेतावनी दी है।

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