सिरगिट्टी गोठान का हाल बेहाल शेड में कचरा, गाय दलदल और गंदगी के बीच रहने मजबूर

सड़कों पर कुचलकर मारी जा रही तो गोठान में गंदगी और दलदल के कारण
बिलासपुर। विडंबना देखिए,शहर में कचरे को रखने के लिए प्रशासन के पास जगह है, लेकिन बेजुबान मूक गायों के लिए ठीक-ठाक व्यवस्था नहीं हो पाई है। नतीजा यह है कि कभी ये गायें सड़कों पर इधर-उधर भटकते हुए हादसों की शिकार हो रही हैं, तो कभी गंदगी और कीचड़ से भरे गोठानों में बेसहारा जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
दरअसल यह तस्वीरें शहर के सिरगिट्टी गोठान की हैं। यहां का हाल देखकर किसी का भी दिल पसीज जाएगा। बरसात के मौसम में जहां लोगों को छत और पनाह की जरूरत होती है, वहीं ये बेजुबान जानवर खुले आसमान के नीचे भीगने को मजबूर हैं। निगम प्रशासन द्वारा इनके लिए शेड तो बनवाए गए हैं, लेकिन शेड की हालत खुद ही बदहाली की गवाही दे रही है। अंदर इतनी गंदगी और कीचड़ है कि गाय वहां खड़ी भी नहीं हो पातीं।गोठान का मैदान दलदल में बदल चुका है। कई बार तो हालात ऐसे बने हैं कि गाय इसमें फंस जाती हैं और बाहर नहीं निकल पातीं। यह किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है। गोबर और गौ मूत्र से पूरा परिसर बदबूदार हो चुका है, जहां इंसान का खड़ा रहना भी मुश्किल है, वहां इन बेजुबानों का दिन-रात गुजारना किस हद तक पीड़ादायक होगा, यह सोचकर ही तकलीफ होती है।इस पूरे मामले में जब निगम प्रशासन से बात की गई, तो सिरगिट्टी जोन कमिश्नर भूपेंद्र उपाध्याय ने कहा कि गोठान में चारे का पर्याप्त भंडारण है। इसके अलावा 2 हाइव गिट्टी भी मंगाई गई थी, लेकिन विद्युत लाइन की वजह से वह गोठान के भीतर नहीं पहुंचाई जा सकी। उनका कहना है कि जल्द ही गोठान में गायों के लिए उचित व्यवस्था बनाई जाएगी और वहां कीचड़ और दलदल की समस्या दूर की जाएगी।
गाय हमारे समाज और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी देखभाल सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी भी है। लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रशासन की ही बनती है, क्योंकि योजनाओं और बजट का प्रावधान उसी के हाथ में है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही सिरगिट्टी गोठान और ऐसे अन्य गोठानों में बेहतर व्यवस्था होगी, ताकि गायें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक इन मूक जानवरों को ऐसे हालात में जीना पड़ेगा? प्रशासन की योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है? करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद गोठान परियोजना का लाभ बेजुबानों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।
वर्जन
गौठान को लेकर पूरी कोशिश है कि सुरक्षित रखा जाए और जानवरों को पूरी सुविधा दी जाए।इसके लिए तैयारिया की जा रही
है।
भूपेंद्र उपाध्याय
जोन कमिश्नर सिरगिट्टी