सीपत क्षेत्र के पंचायत में भ्रष्टाचार का विस्फोट,सरपंच पर फर्जी भुगतान, घटिया निर्माण और अवैध वसूली के गंभीर आरोप..

कलेक्टर से उपसरपंच सहित पंचों ने की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्यवाही की मांग
बिलासपुर। मस्तूरी विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत ऊनी में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। उपसरपंच, पंचगण और ग्रामीणों ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए वर्तमान सरपंच छवीलता देवकुमार साहू पर विभिन्न निर्माण कार्यों में भारी गड़बड़ी, शासकीय राशि के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने सरपंच को तत्काल पद से हटाने और विधिक कार्रवाई के साथ राशि की वसूली की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 को बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के जेसीबी से तोड़ दिया गया, जबकि भवन पूरी तरह उपयोग में था और जर्जर नहीं था। इतना ही नहीं, वर्ष 2016-17 में बने अतिरिक्त भवन को भी ध्वस्त कर दिया गया, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब निजी लाभ और कमीशनखोरी के लिए किया गया, जिससे शासन के धन का नुकसान हुआ है। वहीं
जलध नाला में बनाए जा रहे चेकडैम में भी भारी
अनियमितता का आरोप है। निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और एक बोरी सीमेंट से दो लोड कार्य लिया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उचित मूल्य की दुकान को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राशन का नियमित वितरण नहीं किया जा रहा और गरीबों के हिस्से का चावल और शक्कर बाजार में बेच दिया जाता है, जिससे पात्र हितग्राहियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सीसी रोड निर्माण कार्य में भी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार मशीनों से निर्माण कराने के बावजूद मजदूरी के नाम पर कई लोगों के खाते में राशि डाली गई, जबकि उन्होंने कोई काम नहीं किया। यहां तक कि एक मितानिन कार्यकर्ता को भी मजदूरी भुगतान किया गया, जो वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। नाली निर्माण में भी इसी तरह के फर्जी भुगतान किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि बोरवेल मरम्मत और नई मशीन खरीद के नाम पर सरपंच ने
मरम्मत और नई मशीन खरीद के नाम पर सरपंच ने अपने रिश्तेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया और वास्तविक खर्च से अधिक भुगतान किया गया। शक्ति तालाब के पास निर्माणाधीन मंच में भी मानकों की अनदेखी करते हुए कम मोटाई की ढलाई और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता की कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि पंचायत बैठकों में खर्च का पूरा विवरण नहीं दिया जाता और ब्लैंक रजिस्टर में हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। पंचायत भवन की मरम्मत और रंगाई के नाम पर राशि निकाल ली गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। लामीपारा में बनाए जा रहे पीडीएस खाद्यान्न भंडारण भवन में भी गुणवत्ता से समझौता किए जाने का आरोप है। निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुसार सरिया और बीम का उपयोग नहीं किया गया, जिससे भवन की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं। नल-जल योजना के तहत भी ग्रामीणों से हर महीने 30 रुपये की अवैध वसूली किए जाने का आरोप है। इतना
ही नहीं, जो लोग यह राशि नहीं देते, उन्हें राशन वितरण से वंचित कर दिया जाता है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। जनप्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी सरपंच को तत्काल पद से हटाया जाए और भ्रष्टाचार में लिप्त राशि की वसूली की जाए।