सुकमा वनमण्डल से निलंबित DFO अशोक पटेल पर ACB/EOW की नज़रें आख़िर क्यों टेढ़ी हुई!

सुकमा। इस बाबत मिली जानकारी के अनुसार, सुकमा वन मंडल के अंतर्गत वर्ष 2021 और 2022 के लिए तेंदूपत्ता बोनस की राशि लगभग 6.54 करोड़ रुपये श्रमिकों के बीच बाँटे जाने थे, वह राशि फरवरी से अप्रैल 2024 में जारी हुई।
बताया जाता है कि सुकमा वनमंडलाधिकारी अशोक पटेल ने प्रबंधकों को यह राशि फरवरी से अप्रैल 2024 के बीच दे भी दी थी, लेकिन जनवरी 2025 तक बोनस का वितरण नहीं हुआ।
आदिवासी श्रमिकों को समय पर राशि न मिलने से संदेह गहराया और मामले की जानकारी ऊपर तक पहुँची।
बताया जाता है कि इतने बड़े पैमाने पर सरकारी धन 7-8 महीने तक बिना वितरण के प्रबंधकों के पास पड़ा रहा, जिसकी सूचना उच्च अधिकारियों को नहीं दी गई।
सुकमा से हुए निलंबित DFO अशोक पटेल सुकमा के वनमंडलाधिकारी होने के साथ ही पदेन प्रबंध संचालक भी थे, जिनकी ज़िम्मेदारी थी कि तेंदूपत्ता बोनस की राशि आदिवासी श्रमिकों तक समय पर पहुँचाई जाए, आरोप है कि प्रबंधकों को राशि सौंपने के बाद उन्होंने कोई निगरानी नहीं रखी।
सूत्रों के अनुसार बताया जाता है कि DFO पटेल ने सुकमा में पदभार ग्रहण करते ही ई-भुगतान प्रणाली को दरकिनार कर वन प्रबंधन समितियों के खातों में राशि डलवाई और फिर परिक्षेत्र अधिकारियों को नकद भुगतान करने के लिए प्रेरित किया, इस मामले की भी जाँच चल रही है।
बताया जाता है कि DFO पटेल राज्य वन सेवा से IFS अवार्ड के बीच अधिकतर समय बस्तर क्षेत्र में ही पदस्थ रहे।
कवर्धा में मात्र दो वर्ष ACF के रूप में सेवा देने के बाद वे डीएफ़ओ बीजापुर और उपनिदेशक इंद्रावती टाइगर रिज़र्व बीजापुर में भी तैनात रहे।
पिछली बार उनका तबादला बस्तर से बाहर भी हुआ था, किन्तु वे प्रयास कर दुबारा सुकमा आ गए।
*अब सवाल उठता है कि आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में उनकी लंबी पोस्टिंग के पीछे क्या कारण रहे।*
इसी तरह से राज्य CAMPA के तहत नरवा विकास योजना के अंतर्गत 19 कार्यों को बिना पूरा कराए ही करोड़ों रुपये निकाले जाने की शिकायत भी सामने आई है, जिसकी जाँच जारी है।
मिली जानकारी के मुताबिक CCF रमेश चंद्र दुग्गा एवं वनमंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता की अध्यक्षता में गठित जाँच समिति ने प्राथमिक अनियमितताएँ पाए जाने की रिपोर्ट वन मुख्यालय को भेजी, वहीं से मामला अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) श्रीमती ऋचा शर्मा तक पहुँचा, जिन्होंने इसे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के संज्ञान में रखा।
बता दें कि तेंदूपत्ता बोनस का समय पर वितरण आदिवासी श्रमिकों के हितों से सीधा जुड़ा है, इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका ने विभाग और सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
अब सभी की नज़रें विभागीय जाँच सहित ACB /EOW जाँच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट होगा कि इस कथित घोटाले की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सुकमा के DFO रहे अशोक पटेल की बस्तर से बिदाई हो चुकी है वे निलंबित किए जा चुके है, अब ऐसे में उनके लिए आगे की राह आसान नज़र नहीं आ रही है।