सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहलाजानी टेस्ट ट्यूब सेंटर पर एफआईआर करने का आदेश हो जाने के बावजूद कड़ी कार्यवाही या आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, पीड़ित को अब तक बच्चा क्यों नहीं दिलाया जा सका -प्रियंका शुक्ला

आरोपियों को बचाने का काम कर रही है छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार
सरकार के संरक्षण में लिंग आधारिक भेदभाव, बच्चों को अदला बदली चल रहा है खेल इमरान खान,
रायपुर। आम आदमी पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला ने आयोजित प्रेस वार्ता में 2 वर्ष पूर्व रायपुर के माता लक्ष्मी नर्सिंग होम पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में नवजात बच्चे की अदला बदली पर कहा कि मामले में 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी फरवरी 2025 में जब मीडिया का दबाव पड़ा तब जाकर मामले में पहलाजानी टेस्ट ट्यूब सेंटर पर एफआईआर दर्ज हुई थी, बावजूद आज तक इसमें पीड़ित को बच्चा नहीं मिल पाया है।
दरअसल दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी अशोक कुमार सिंह और उनकी पत्नी उषा सिंह साल 2022 में संतान प्राप्ति के लिए रायपुर के अनुपम नगर स्थित माता लक्ष्मी नर्सिंग होम पहुंचे थे। यहां संचालित पहलाजनी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर में डॉक्टरों ने आईवीएफ प्रक्रिया के जरिए संतान होने का आश्वासन दिया था। इसके बाद अप्रैल 2023 में दोबारा आईवीएफ प्रक्रिया कराई गई। जिससे 25 दिसंबर 2023 को जब ऑपरेशन के जरिये उषा सिंह को दो जुड़वा बच्चे हुए, परिजनों के अनुसार एक बेटा और बेटी हुए थे। यह बात अस्पताल के ही स्टाफ के द्वारा परिजनों को जुड़वा बच्चों में एक लड़का एक लड़की होना बताया लेकिन उन्हें दोनों लड़कियां ही दी गई।
फिर परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चों की अदला-बदली की गई है। संदेह गहराने पर बच्चों के पिता अशोक कुमार सिंह ने निजी स्तर पर डीएनए जांच कराई, जिसमें सरकार ने लगातार मामले में कोई मदद नहीं की उल्टा एक मेडिकल बोर्ड की टीम का गठन करके उल्टा ivf सेंटर के पक्ष में ही रिपोर्ट पेश कर दी और उसी के कारण हाई कोर्ट से मामला पहलजानी आईवीएफ सेंटर के पक्ष में आया, किंतु पीड़ित पिता द्वारा यही हार नहीं मानी गई,मामले को उच्चतम न्यायालय तक लेकर गए, जहा मामला जब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तब जाकर छत्तीसगढ़ के पहलाजानी टेस्ट ट्यूब सेंटर के विरुद्ध FIR के आदेश दिए गए, दिनांक 19 जनवरी 2026 को FIR के आदेश के बाद भी लंबे समय पर FIR नहीं होने से पुनः आम आदमी पार्टी के द्वारा मामले पर सवाल किए गए, मीडिया में खबरें प्रकाशित हुई, तब कही जाकर दिनांक 06 फरवरी 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के पालन में FIR दर्ज हुई, किंतु आज तक मामले में जिस प्रकार से जांच हो रही है, उससे पीड़ित परिजन को न्याय मिल सकेगा यह संदेह के घेरे में है।
प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अब तक सुप्रीम कोर्ट के द्वारा FIR किए जाने के आदेश के बाद भी सरकार के तरफ से महिला विकास मंत्री ने आज तक मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया, सरकार मौन है, इससे यह दर्शित होता है कि कही न कही आरोपियों को सरकार का पूरा संरक्षण प्राप्त है, प्रियंका ने आगे यह भी सवाल किया कि छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार की पुलिस आज तक बच्चे को ढूंढने में कोई कार्य नहीं कर रही है,आखिर पीड़ित को बच्चा कब दिया जायेगा और इस मामले में प्रदेश में राज्य के महिला आयोग भी है, बावजूद उनके द्वारा भी मामले में दखल क्यों नहीं दिया है?
आम आदमी पार्टी यह मांग करती है कि मामले में निष्पक्ष और कड़ाई से जांच हो और आरोपी गण की गिरफ्तारी हो, साथ ही जल्द से जल्द बच्चे को ढूंढकर परिजनों को वापस किया जाए।