सूर्य हमारा सपना है-राजेंद्र गुप्ता
हर तरफ़ है शब्द भेदी सन्नाटा

बिलासपुर। देश के जाने-माने फिल्म अभिनेता व रंगमंच के कलाकार राजेंद्र गुप्ता ने धूमिल की कविता पटकथा , संसद से सड़क तक का शानदार मंचन किया। प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा द्वारा आयोजित इस नाट्य मंचन में गहरी नाटकीय अभिव्यक्ति लिए कविता को एकल अभिनय में प्रस्तुत कर राजेन्द्र गुप्ता आख़िर तक दर्शकों को बाँधे रखने में सफल रहे । जब वे अपने अभिनय और प्रभावी आवाज़ से दर्शकों को कविता के भीतर ले जाते हैं तो कभी तालियाँ और कभी गहरा सन्नाटा प्रतिक्रिया बनता है । कविता में प्रारंभ से अंत गहरी निराशा, तनाव और गुस्सा है । अपने अभिनय कौशल से राजेन्द्र इसे प्रस्तुत करने में सफल रहे ।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सभागृह में उन्होंने दर्शकों के सवालों के जवाब भी दिए और बिलासपुर के कला प्रेमी दर्शकों की तारीफ भी की। अपने नाट्य मंचन के माध्यम से जनता को संदेश देने का प्रयास कि नैतिकता की दुहाई देने वाले जिसकी पीठ ठोकते हैं उसकी रीढ़ की हड्डी गायब हो जाती है जिस अंदाज़ में उन्होंने कहा कि पूरा सभागृह तालियों से गूंज उठा । राजेंद्र के स्वर का उतार – चढ़ाव उनकी प्रस्तुति को और प्रभावी बनाते रहा । लंबी कविता का मंचन यूं भी चुनौती होती है पर राजेन्द्र अपने अभिनय कौशल और कविता की समझ के कारण सफल रहे । एक जगह उन्होंने कहा कि शायद मैं नींद में अपने से ही बात कर रहा था। और वहीं कविता के माध्यम से वे कहते हैं कि जिसने सच कह दिया उसका बुरा हाल है ।
कविता पटकथा के नाट्य मंचन का निर्देशन आर.एस.विकल ने किया और संगीत आदित्य शर्मा का था।
कार्यक्रम शुरू होने के पहले मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथाकार लोक बाबू ने अपने संबोधन में शुभकामनाएँ दी और कहा कि धूमिल की इस कविता का आज मंचन और ज़्यादा महत्वपूर्ण है । उस समय उठाए गए सवाल आज भी हमें बेचैन करते हैं । इसके पूर्व प्रगतिशील लेखक संघ और इप्टा तथा आई एम ए, आधारशिला और संस्था वस्तुतः से जुड़े डॉ.राकेश सक्सेना , डॉ आर. ए शर्मा,अरुण दाभडकर,हबीब खान ,नथमल शर्मा ,सत्यभामा अवस्थी, रफीक खान, अजय श्रीवास्तव , अजय नज़ात , सचिन शर्मा, नरेश अग्रवाल,कल्याणी वर्मा सहित शहर के साहित्य प्रेमियों ने उनका स्वागत किया। मंच पर प्रलेस के महासचिव परमेश्वर वैष्णव भी मौजूद थे ।वस्तुतः के चेतन आनंद दुबे ने शॉल श्रीफल से सम्मानित किया । संचालन सत्यभामा अवस्थी ने और सचिन शर्मा ने आभार व्यक्त किया ।
कविता प्रेमी राजेंद्र गुप्ता
रंगकर्मी और अभिनेता राजेन्द्र गुप्ता कविता प्रेमी हैं। पिछले एक दशक से हिन्दी कविताओं का पाठ वह निरंतर करते रहे हैं। कविता पाठ या काव्य आवृत्ति एक स्वतंत्र विधा है। राजेन्द्र गुप्ता इसमें पारंगत हैं। सही अर्थों में यह रंग निर्देशक आर एस विकल के निर्देशन में धूमिल की कविता का मंचन था जिसके मुख्य किरदार राजेन्द गुप्ता थे।
इस प्रस्तुति में राजेन्द्र गुप्ता अपने काव्य पाठ के आरोह-अवरोह, टोन और आंगिक क्रियाओं के माध्यम से दर्शकों के भावतंत्र को कभी पीड़ा और हताशा की नदी में डुबो देते हैं तो कभी अपनी प्रखर और ओजस्वी वाणी से झकझोर देते हैं।
नाट्य निर्देशक विकल कविता के कई अंशों को वॉयस ओवर की माध्यम से पेश करते है।
हाँ हमें भी वे सवाल बेचैन करते हैं-राजेंद्र
पाँच दशक पहले लिखी गई कविता पटकथा आज भी सवाल कर रही है और जिन सवालों के जवाब आप तलाश कर रहे हैं वे ही जवाब तो हम भी तलाश कर रहे हैं ।
कविता पटकथा के नाट्य मंचन के बाद सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता और रंगमंच के लिए समर्पित कलाकार राजेन्द्र गुप्ता ने दर्शकों के सवाल के जवाब में उक्त बातें कहीं । राजेन्द्र गुप्ता के नाट्य मंचन से नगर के दर्शक अभिभूत थे और उन्हें कविता में उठाए गए सवाल झँझोड़ रहे थे । एक सवाल के जवाब में राजेन्द्र गुप्ता ने कवियित्री रईसा से कहा कि वे हालात आज भी कहाँ बदले हैं । भले ही पाँच दशक पहले की कविता है पर आज भी बल्कि आज तो ज़्यादा प्रासंगिक है । एक दर्शक ने दुष्यंत कुमार के शेर कि पानी कहाँ ठहरा होगा से बात जोड़ी और यही पूछा जिस पर राजेंद्र गुप्ता ने तपाक से कहा कि सीधी सी बात है भई कि गढ्ढा रहा होगा तभी तो पानी ठहरा हुआ है । इस जवाब पर जोरदार तालियाँ बजी । वहीं नाट्क के निर्देशक आर एस विकल ने कहा कि कविता लगातार समय से टकराती है और सवाल करती रही है यह तो हमें तय करना है कि हमने उस चुनौति को स्वीकार करना सीख लिया है या नहीं । नाट्य मंचन के बाद यह सवाल जवाब का सत्र बेहद आकर्षक रहा । दर्शकों की ओर से सवाल करने वालों में रेखा सक्सेना, प्रियंका, द्वारकाप्रसाद अग्रवाल, डॉ मेहता,अतुल खरे आदि थे । पत्रकारों ने सवाल पूछे ।