सेंट्रल जेल में ओवरक्राउडिंग का विस्फोट 2290 क्षमता,3127 बंदी….837 बंदी ज्यादा बिलासपुर जेल में हालात बेकाबू

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बिलासपुर। सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाली और बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है। क्षमता से कहीं ज्यादा बंदियों को समेटे यह जेल अब ओवरक्राउडिंग की चरम स्थिति पर पहुंच चुका है। 2290 बंदियों की स्वीकृत क्षमता वाली इस जेल में इस समय 3127 बंदी बंद हैं,यानी 837 बंदी अधिक है। लंबे समय से पूरी छत्तीसगढ़ की जेलों में यही हालात बने हुए हैं, लेकिन समाधान के नाम पर केवल फाइलें और टेंडर ही आगे बढ़ रहे हैं।
दरअसल, शहर से लगे ग्राम बैमा में 50 एकड़ जमीन पर नए सेंट्रल जेल की योजना पिछले कांग्रेस शासनकाल से चली आ रही है। लेकिन पिछले 4–5 सालों से टेंडर प्रक्रिया ही आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिसके कारण पुराना जेल हर दिन क्षमता से अधिक मतलब दोगुना बोझ उठा रहा है।सेंट्रल जेल प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार पुरुष जेल में 2451 और महिला जेल में 176 बंदी हैं। लगभग 18.5 एकड़ में फैले जेल परिसर में से करीब 12 एकड़ हिस्सा ही वास्तविक उपयोग में है, जहां 45 पुरुष बैरकों और 4 महिला बैरकों में बंदियों को रखा गया है। हालात यह हैं कि बैरकों में जगह से ज्यादा लोग ठुंसे हुए हैं, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ता ही जा रहा है।
इतने कम सुरक्षाकर्मियों के साथ जेल की सुरक्षा व्यवस्था कितनी कमजोर होगी—इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अंदर किसी भी स्थिति में गड़बड़ी हुई तो उसे संभालना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।ओवरक्राउडिंग, स्टाफ की भारी कमी और नई जेल निर्माण में देरी ये तीनों मिलकर एक गंभीर संकट की तरफ इशारा कर रहे हैं।
जेल में सुरक्षा प्रहरी बेहद कम स्थिति चिंताजनक
अब बात करते हैं सुरक्षा की जो सबसे चिंताजनक है।यहां 180 स्वीकृत पदों में से 66 पद खाली हैं। शेष स्टाफ में अधीक्षक, डॉक्टर, फार्मासिस्ट और ऑफिस स्टाफ को निकाल दें तो सुरक्षा के लिए महज 90–95 प्रहरी ही बचते हैं। तीन शिफ्टों में ड्यूटी के बाद हर शिफ्ट में केवल 30–32 प्रहरी ही 3127 बंदियों की निगरानी कर पा रहे हैं।
50 एकड़ में नया जेल सिर्फ कागजों मे,जमीनी हकीकत शून्य
सेंट्रल जेल के लिए
पूर्व की कांग्रेस सरकार ने बैमा नगोई में 50 एकड़ में सेंट्रल जेल के लिए दिया था।लेकिन देखा जाए तो जमीन हकीकत शून्य है।बल्कि अभी तक किसी
तरह का कोई भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।जमीन बंजर ही पड़ी हुई है और अधिकारी भी सिर्फ कागजों में बात कर रहे है।
क्षमता से अधिक बंदी होने से रहने खाने पीने और देखरेख में होती है समस्या
जेल अधीक्षक का कहना है कि जेल के क्षमता से अधिक बंदियों के रहने से
खाने पीने और रहने की काफी समस्या होती है।यही कारण है कि इसके लिए स्टाफ की भी जरूरत पड़ती है और स्टाफ की कमी के कारण बंदियों का देखरेख करने में काफी समस्या होती है।
वर्जन
जेल मे क्षमता से अधिक बंदी भरे हुए है। बैमा नगोई में जेल बन रहा है।जेल बनने के बाद पूरी समस्या खत्म हो जाएगी।
खोमेश मंडावी
अधीक्षक सेंट्रल जेल बिलासपुर