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शताब्दी वर्ष में बिलासपुर रेलवे स्टेशन का सुनहरा सफर

अतीत की महक के साथ आधुनिकता की नई उड़ान

बिलासपुर । रेलवे स्टेशन 14 अगस्त को अपने 100 वर्ष पूरे कर शताब्दी समारोह मनाने जा रहा है। 1889 में स्थापित यह स्टेशन न सिर्फ रेल मार्ग का अहम पड़ाव है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान और गर्व का प्रतीक भी है। हर दिन 70 हजार यात्री और 350 से अधिक ट्रेनों का संचालन यहां से होता है।यही वह जगह है, जहां 1918 में रवींद्रनाथ टैगोर ने अपनी प्रसिद्ध कविता ‘फांकी’ लिखी थी, जो इस स्टेशन को साहित्य के पन्नों में अमर कर देती है।यह स्टेशन सिर्फ लोहे के पटरियों और भवनों का ढांचा नहीं, बल्कि पीढ़ियों की यादों और कहानियों का ठिकाना है। कभी यहां घोड़ा-टांगा यात्रियों को घर पहुंचाता था, आज आधुनिक टिकटिंग, कोच रेस्टोरेंट और दिव्यांग सुविधाएं यात्रियों की सेवा कर रही हैं। स्टेशन के ऐतिहासिक भवन और शताब्दी पुरानी इमारतें हर आगंतुक को ठहरकर देखने और महसूस करने पर मजबूर करती हैं।खेल, पर्यटन और रोजगार में भी इस स्टेशन का योगदान कम नहीं रहा है। यह अचानकमार टाइगर रिजर्व, रतनपुर महामाया मंदिर और चैतुरगढ़ जैसे स्थलों का प्रवेश द्वार है। यहां की सांस्कृतिक विविधता, मंदिरों और स्कूलों के रूप में स्टेशन परिसर की सामाजिक धड़कन आज भी धड़क रही है।अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इसका भविष्य और भी उज्ज्वल होने जा रहा है। नए भवन, विस्तृत प्लेटफार्म, एयर कॉनकोर्स, एस्केलेटर, लिफ्ट, पार्किंग, सौर ऊर्जा और 400 सीसीटीवी कैमरे जैसी सुविधाएं यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव देंगी। यह बदलाव स्टेशन को न केवल आधुनिक और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि इसके गौरवशाली इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा।

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