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स्टीकर न लगाने से प्रतियोगी का मूल्यांकन रोका

व्यापम की कड़ी कार्रवाई

बिलासपुर।आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक सरकंडा एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। वह भी ऐसे मामले को लेकर, जिसने एक प्रतियोगी छात्र के भविष्य को सीधे अधर में लटका दिया है। रविवार 28 नवंबर 2025 को आयोजित व्यापम की हैंडपंप टेक्नीशियन भर्ती परीक्षा के दौरान इस परीक्षा केंद्र पर ऐसी लापरवाही सामने आई, जिसने बिलासपुर की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

व्यापम की गोपनीयता नीति के तहत हर उत्तर पुस्तिका पर अनिवार्य रूप से सुरक्षा स्टीकर लगाया जाता है, लेकिन इस केंद्र के पर्यवेक्षक और केंद्र अध्यक्ष—दोनों ने इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि वैल्यूएशन के दौरान कॉपी को संदिग्ध मानते हुए मूल्यांकन तुरंत रोक दिया गया। व्यापम ने इसे परीक्षा इतिहास की एक अभूतपूर्व चूक माना है, क्योंकि बिलासपुर में यह पहला मामला है जब किसी प्रतियोगी की कॉपी बिना स्टीकर होने के कारण वैल्यूएशन बीच में रोकनी पड़ी।
वैल्यूएशन रोकने के बाद व्यापम ने सप्ताहांत में ही एक विस्तृत पत्र कलेक्टर को भेजकर तत्काल जांच की मांग की। कलेक्टर ने इस पत्र को गंभीरता से लेते हुए इसे नोडल अधिकारी, डिप्टी कलेक्टर शिव कंवर को अग्रेषित किया। शिव कंवर ने साफ शब्दों में कहा
यह अत्यंत गंभीर चूक है। केंद्र अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से व्यापम के सामने उपस्थित होकर बताना होगा कि बिना स्टीकर के कॉपी कैसे स्वीकार की गई। यह गलती अनजाने में हुई या किसी को लाभ देने के उद्देश्य से—इसकी जांच अनिवार्य है।
दिलचस्प बात यह है कि जब इस मामले को लेकर पत्रकारों ने केंद्र अध्यक्ष पी.मंडल से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनका मोबाइल फोन लगातार बजता रहा लेकिन उठाया नहीं गया। जाहिर है कि इस गंभीर मामले में उनकी तरफ से कोई जवाब सामने नहीं आया है। वहीं व्यापम ने पहले ही संकेत दे दिया है कि यह लापरवाही सिर्फ एक गलती नहीं मानी जाएगी बल्कि यह देखा जाएगा कि यह चूक अनजाने में हुई, या किसी विशेष प्रतियोगी को लाभ पहुंचाने की कोशिश थी।

यह वही स्कूल है, जो पहले भी नकल जैसे हाई-टेक विवादों में घिर चुका है। सात महीने पहले इसी विद्यालय में एक प्रतियोगिता के दौरान हाइटेक उपकरणों के सहारे नकल कराने का बड़ा मामला सामने आया था। अब फिर से परीक्षा प्रक्रिया में इस तरह की चूक—सीधे-सीधे विद्यालय की विश्वसनीयता पर सवाल लगाती है।
फिलहाल व्यापम की जांच तेज हो चुकी है। प्रतियोगी का भविष्य परिणाम के रोके जाने के कारण अधर में है। और अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि व्यापम की कार्रवाई किस दिशा में जाती है।क्योंकि इस बार मामला सिर्फ एक गलती का नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की पूरी विश्वसनीयता दांव पर है।

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