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स्वास्थ व्यवस्था चरमराई, आठवें दिन तक जारी NHM कर्मचारियों की हड़ताल

कर्मचारियों ने संविदा प्रथा के खिलाफ किया पुतला दहन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में कार्यरत 16,000 से अधिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी अपनी नियमितीकरण एवं 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। हड़ताल का आज आठवां दिन है और इसका सीधा असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। संविदा प्रथा के खिलाफ कर्मचारियों ने पुतला दहन कर दाह संस्कार भी किया।

लगातार सेवा देने के बावजूद पिछले 20 वर्षों से NHM कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार से कई बार वार्ता होने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन मिला है, लेकिन स्थायित्व और उचित वेतनमान आज तक नहीं मिल सका। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, स्थानांतरण नीति, सेवा शर्तों का निर्धारण और सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं।
हड़ताल के चलते जिले के जिला चिकित्सालय,सिम्स अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं। चिकित्सा अधिकारी, नर्स, ANM, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, काउंसलर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, अकाउंटेंट सहित अन्य संविदा स्टाफ भी हड़ताल में शामिल हैं, जिससे अस्पतालों में मरीजों की भारी परेशानी बढ़ गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। CHO और ANM के हड़ताल पर जाने से उप स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह बंद हो गए हैं। बरसात के मौसम में सर्दी, खांसी, बुखार और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उन्हें समय पर इलाज और दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
हड़ताल की वजह से राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे मलेरिया, टीबी, टीकाकरण, महामारी निगरानी, जन्म-मृत्यु पंजीयन और प्रसव सेवाएं भी बाधित हो गई हैं। OPD और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। संघ का कहना है कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि लाखों मरीजों और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा है। कार्यकारी प्रांताध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उन्होंने कहा कि आम जनता को हो रही परेशानी के लिए पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। कर्मचारी अपने हक और भविष्य की सुरक्षा की लड़ाई जारी रखेंगे।

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