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हमारी शक्ति, हमारा ग्रह

पृथ्वी दिवस 2025 पर विशेष

बिलासपुर – 22 अप्रैल 2025 को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस इस वर्ष “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” थीम पर केंद्रित है। यह विषय न केवल एक प्रेरक नारा है, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और भविष्य निर्माण की क्षमता को भी दर्शाता है। यदि हम सभी एकजुट होकर कार्य करें, तो हम अपनी धरती को एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध ग्रह बना सकते हैं। क्या हम अपने बच्चों को एक प्रदूषण-मुक्त और हरित पृथ्वी देना चाहते हैं?
यदि हाँ, तो अब समय है कि हम अपनी आदतों और नीतियों में परिवर्तन करें। पृथ्वी को बचाने की यात्रा हमसे ही शुरू होती है।

पृथ्वी पर बढ़ता संकट – खतरे की घंटी

आज मानव गतिविधियाँ हमारे पारिस्थितिक तंत्र को गहरा नुकसान पहुँचा रही हैं। प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं:

  1. जलवायु परिवर्तन

1880 से अब तक वैश्विक तापमान में 1.2°C की वृद्धि।

यदि यही प्रवृत्ति जारी रही, तो 2100 तक यह 2.7°C तक पहुँच सकता है।

छत्तीसगढ़ में औसत तापमान में पिछले 30 वर्षों में लगभग 1.4°C की वृद्धि दर्ज की गई है।

  1. वनों की कटाई

प्रतिवर्ष लगभग 10 मिलियन हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में 2021-23 के बीच लगभग 6,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कमी आई है।

इससे जैव विविधता, कार्बन संतुलन, और आदिवासी समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

  1. प्रदूषण

वायु प्रदूषण से हर वर्ष लगभग 70 लाख लोगों की समयपूर्व मृत्यु।

रायपुर और कोरबा जैसे छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में PM 2.5 स्तर राष्ट्रीय औसत से 2 गुना अधिक पाया गया है।

जल और मृदा प्रदूषण भी बढ़ती बीमारियों और कृषि संकट का कारण हैं।

  1. प्राकृतिक संसाधनों का दोहन

अर्थ ओवरशूट दिन जुलाई या अगस्त में ही आ जाता है।

छत्तीसगढ़ में भूमिगत जल स्तर में औसतन 10-12 मीटर की गिरावट पिछले दो दशकों में देखी गई है।

समाधान – हम ही हैं बदलाव!

  1. व्यक्तिगत स्तर – हर व्यक्ति की भूमिका

ऊर्जा संरक्षण

प्रत्येक परिवार यदि केवल 1 LED बल्ब प्रयोग करे, तो 5 करोड़ टन CO₂ उत्सर्जन रोका जा सकता है।

जल संरक्षण

एक टपकता नल प्रति वर्ष लगभग 3000 लीटर पानी बर्बाद करता है।

पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली

1 मिलियन लोग यदि प्लास्टिक थैली का उपयोग बंद करें, तो सालाना 500 मिलियन प्लास्टिक बैग की बचत संभव।

पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग

1 टन पुनर्चक्रित कागज से 17 पेड़ बच सकते हैं, और 60% ऊर्जा की बचत होती है।

  1. सामाजिक स्तर – समुदायों की शक्ति

पर्यावरण शिक्षा

छत्तीसगढ़ के कई स्कूलों में पर्यावरण क्लब कार्यरत हैं, इन्हें और अधिक सक्रिय बनाए जाने की जरूरत है।

वृक्षारोपण अभियान

यदि राज्य के 28 लाख स्कूल छात्र-छात्राएँ प्रति वर्ष 1-1 पौधा लगाएँ, तो 2.8 करोड़ नए पौधे हर वर्ष लगाए जा सकते हैं।

साझा परिवहन एवं साइकिलिंग

रायपुर स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत साइकिल साझा योजना चलाई गई, जिसे और जिलों में विस्तारित करने की आवश्यकता है।

  1. नीति एवं वैश्विक सहयोग – दीर्घकालिक दृष्टिकोण

कड़े पर्यावरण कानून

कई देशों ने 2050 तक कार्बन तटस्थता का लक्ष्य तय किया है।

छत्तीसगढ़ सरकार भी “हरित बजट” की योजना पर विचार कर रही है, जिसमें पर्यावरणीय परियोजनाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा नीति 2017 के अनुसार 2027 तक 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है।

अंतर्राष्ट्रीय समझौते

पेरिस समझौता (2015) का उद्देश्य वर्ष 2100 तक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखना है।

बदलाव हम से ही शुरू होता है!

पृथ्वी दिवस 2025 की थीम “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” इस बात का प्रतीक है कि हर व्यक्ति, हर समुदाय और हर देश मिलकर धरती को पुनः हरित, स्वच्छ और समृद्ध बना सकता है।

हमारी छोटी-छोटी आदतें, जैसे –
एक पौधा लगाना,
प्लास्टिक का कम उपयोग,
जल संरक्षण,
ऊर्जा बचत –
मिलकर महान परिवर्तन का आधार बन सकती हैं।

आइए, इस पृथ्वी दिवस पर एक संकल्प लें –
“हमारी शक्ति से, हम अपने ग्रह को हरा-भरा और सुरक्षित बनाएँगे!”

अजीत विलियम्स,
साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री),
बीटीसी कॉलेज ऑफ़ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर

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