
बिलासपुर जिला से वासित अली की रिपोर्ट

बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ एवं कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की संयुक्त अनिश्चितकालीन हड़ताल करने के लिए बिलासपुर में संभाग स्तरीय कर्मचारी सब इकट्ठा हुए सहकारी समिति कर्मचारी 3 स्तरीय मांगों को लेकर हड़ताल पर है
जिसमें पहली मांग,,,,, (1),,मध्य प्रदेश मे मिल रही तीन लाख प्रबंधकीय अनुदान की तर्ज पर छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा प्रत्येक समितियां को तीन-तीन लाख रुपए प्रबंधकीय अनुदान दिया जाए
(2),,,,, पुनरीक्षित वेतनमान लागू की जाए और 50% समिति कर्मचारियों की भर्ती की जाए
(3),,,,, समर्थन मूल्य धान खरीदी 2023-24 और 2024- 25 मे धान परिदान पश्चात हुई संपूर्ण सुखत को मान्य किया जाए, सुरक्षा व्यय एवं फसल बीमा को चार गुना बढ़ोतरी, राशन वितरण पर प्रति क्विंटल 500 ग्राम क्षतिपूर्ति पर ₹5000 दी जावे इत्यादि छोटी-छोटी मांगे सम्मिलित है
यह सभी बहु प्रतीक्षित मांग रही है कर्मचारियों की मांग है कि त्रिस्तरीय मांग को सरकार अनसुनी कर रही है जिसके लिए कर्मचारियों ने 28 अक्टूबर को ज्ञापन रैली देकर सांकेतिक रूप से रैली निकालकर सरकार को चेतावनी दी थी कि उनकी मांगे जल्द पुरी की जाए मांग पूरी नहीं होने पर
3 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे
पर सरकार ने उनकी नहीं सुनी और मांगे पूरी नहीं होने पर 3 नवंबर से जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ व कंप्यूटर ऑपरेटर सभी ने मिलकर छत्तीसगढ़ स्तर पर धरना प्रदर्शन दे रहे हैं छत्तीसगढ़ के सभी संभागों में अपने संभाग के मुख्यालय में यह धरना प्रदर्शन आयोजित हो रहा है
छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार समर्थन मूल्य पर किसानों का धान खरीदी करना सरकार की प्रमुखता रही है और 15 नवंबर से किसानों का धान खरीदी प्रारंभ करने जा रही है और ऐसे में सहकारी समितियो का अनिश्चितकालीन हड़ताल में चले जाना निश्चित रूप से सरकार और किसानो की परेशानियों को बढ़ा रही है कर्मचारियों के हड़ताल में चले जाने से किसानो की धान बेचने की समस्या उत्पन्न हो रही है लगभग एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी शासन उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है ऐसे में हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि अगर हमारी त्रिस्तरीय मांगों को सरकार पूर्ण नहीं करती है तो हम आने वाले समय में उग्र आंदोलन भी करेंगे अब देखने वाली बात होगी एक सप्ताह हड़ताल करने वालों को सरकार की तरफ से क्या पहल की जाती है वही एक सप्ताह धान खरीदी के समय को शेष रह गया है ऐसे में सरकार और कर्मचारियों के बीच आखिर समझौता कब तक होगी यह देखने वाली बात होगी
सरकार और कर्मचारी की चक्की के दो पाठ के बीच किसान फिलहाल पिस्ता हुआ नजर आ रहा है ऐसे में किसानो को अपने फसल बेच नहीं पाने की चिंता सता रही है



