Blog

98 दिन से लिंगियाडीह में आशियाने बचाने महिलाओं-बच्चों का महा आंदोलन

बेघर होने का डर गहराया महिलाओं को

बिलासपुर। शहर के लिंगियाडीह क्षेत्र में अपने घरों को बचाने के लिए पिछले 98 दिनों से महिलाएं, बच्चे, बुज़ुर्ग और गरीब परिवार शांतिपूर्ण महा आंदोलन पर डटे हुए हैं। दशकों से बसे इन परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। आंदोलन की लंबी अवधि के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाते हुए लोगों में आक्रोश और पीड़ा बढ़ती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम में वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल आंदोलनकारियों के साथ लगातार मौजूद हैं।
गार्डन और परिसर निर्माण के नाम पर हटाने की तैयारी
लिंगियाडीह क्षेत्र में नगर निगम द्वारा गार्डन और परिसर निर्माण की योजना के तहत वर्षों से बने मकानों को हटाने की तैयारी की जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे 40 से 50 वर्षों से इसी इलाके में निवास कर रहे हैं। उनके पास बिजली कनेक्शन, पानी की सुविधा, राशन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
इसके बावजूद सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छिनने की आशंका बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि इतने लंबे समय से बसे होने और दस्तावेज होने के बाद भी उन्हें अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।
98 दिन से धरने पर महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग
98 दिनों से जारी इस महा आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग धरना स्थल पर बैठे हैं। आंदोलनकारी परिवारों का कहना है कि अब तक न तो प्रशासन की ओर से कोई ठोस संवाद हुआ है और न ही किसी प्रकार का लिखित आश्वासन दिया गया है। इससे क्षेत्र में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
पार्षद दिलीप पाटिल बोले – “विकास के नाम पर छत उजाड़ना स्वीकार नहीं”
आंदोलन के दौरान वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल लगातार स्थल पर पहुंचकर लोगों से चर्चा कर रहे हैं और उनकी समस्याओं को निगम व प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा—
“विकास जरूरी है, लेकिन विकास के नाम पर गरीबों की छत उजाड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने मांग की कि यदि नगर निगम को विकास कार्य करना है तो पहले स्थायी पुनर्वास नीति बनाई जाए और वर्षों से रह रहे परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रशासन से आंदोलनरत लोगों से सीधे संवाद कर मानवीय समाधान निकालने का आग्रह किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *