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एकीकृत किसान पोर्टल, डाटा सुधार के लिए सभी कलेक्टरों को निर्देश

धान उपार्जन प्रक्रिया में बाधा रोकने डाटा परीक्षण अनिवार्य

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग ने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत किसानों के डाटा में पाई गई विसंगतियों को सुधारने के लिए प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। खरीफ फसल पंजीयन प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2024 को समाप्त हो चुकी है। और डाटा विश्लेषण में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।

डाटा में पाई गई मुख्य विसंगतियां

एक ही समिति के लॉगिन से दो या अधिक किसानों के लिए एक ही बैंक खाता क्रमांक का उपयोग, खसरों के नाम में भुईयां पोर्टल और पंजीकरण पोर्टल के बीच विसंगतियां, पंजीकृत खसरों के मालिकों के नाम और भुईयां पोर्टल में दर्ज भू-स्वामी के नाम का मिलान न होना।

समस्या समाधान के लिए निर्देश

कलेक्टरों को आदेश दिया गया है कि इन विसंगतियों की सूची, जो ई-मेल के माध्यम से भेजी गई है, का परीक्षण तहसील और समिति स्तर पर एनआईसी के सहयोग से किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना है कि आगामी धान उपार्जन प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।

प्रभावित किसानों के लिए राहत

इस पहल का उद्देश्य किसानों को योजनाओं का सही लाभ देना और पंजीयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। सरकार का मानना है कि इस सुधार से धान उपार्जन और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी।

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प्राथमिकता पर पूरा करने की अपील

कृषि विभाग ने संबंधित अधिकारियों से इस प्रक्रिया को प्राथमिकता पर पूरा करने की अपील की है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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