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नाबालिग से ले लिया मोबाइल, फांसी पर लटकी मिली लाश

बिलासपुर। सरकंडा क्षेत्र में रहने वाली छात्रा अपने घर पर फांसी के फंदे पर लटकी मिली। स्वजन उसे फंदे से उतारकर अपोलो पहुंचे। वहां पर डाक्टरों ने छात्रा को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना पर पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पीएम कराया है। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि छात्रा ज्यादा समय तक मोबाइल चलाती थी। आशंका है कि स्वजन ने मोबाइल ले लिया तो उसने आत्मघाती कदम उठाया होगा। फिलहाल इसकी जांच चल रही है।
सरकंडा थाना टीआइ निलेश पांडेय ने बताया कि वसंत विहार के पास रायल पैलेस के सामने रहने वाली एंजल जैसवानी नौवीं कक्षा की छात्रा थीं। शनिवार की रात वह अपने कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी मिली। स्वजन ने आनन-फानन में फंदा काटकर छात्रा को अपोलो पहुंचाया। वहां पर डाक्टरों ने छात्रा को मृत घोषित कर पुलिस को सूचना दी। इस पर पुलिस ने रविवार को शव कब्जे में लेकर पीएम कराया है। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि छात्रा मोबाइल पर ज्यादा समय बिताती थी। स्वजन उसे मना करते हुए पढ़ाई पर ध्यान देने कहते थे। शनिवार को स्वजन ने उससे मोबाइल ले लिया था। आशंका है कि मोबाइल के कारण छात्रा ने आत्मघाती कदम उठाया होगा। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद पूरा मामला स्पष्ट होगा।

बच्चों में मोबाइल की बढ़ती लत और इसके दुष्परिणाम

जिला अस्पताल में पदस्थ डा गामिनी वर्मा ने बताया कि मोबाइल की लत बच्चों में एक आम समस्या बनती जा रही है। कई बार इसके गंभीर परिणाम भी सामने आते हैं। समय रहते इस ओर उचित ध्यान नहीं देकर समस्या का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने पालकों से इस ओर ध्यान देने की अपील की है। साथ ही कुछ सुझाव दिए हैं।
आत्मघाती कदम और आधुनिकता

जरूरत से ज्यादा आधुनिकता बच्चों को भावनात्मक रूप से कमजोर बना रही है।

बच्चे मोबाइल से आत्महत्या जैसे कदम के बारे में जानने लगे हैं।

मोबाइल की लत के कारण

बच्चे बिना मोबाइल देखे खाना नहीं खाते।

दिनभर मोबाइल पर गेम खेलते हैं और उसे अपनी वास्तविक दुनिया मान लेते हैं।

नकारात्मक प्रभाव

बच्चों में चिड़चिड़ापन और गुस्से की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

उम्र से अधिक परिपक्वता (ओवर मेच्युरिटी) दिखने लगी है।

पालकों की जिम्मेदारी

मोबाइल की लत बच्चों को पालकों ने ही शुरू कराई है।

पालकों को बच्चों को प्यार से समझाना चाहिए कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग उनके लिए हानिकारक है।

बच्चों को बचपन से तकनीक का सीमित और सही उपयोग सिखाना चाहिए।

समाधान और सुझाव

बच्चों को वर्चुअल दुनिया से दूर करने के लिए बाहरी दुनिया से जोड़ें।

बच्चों को खेल-कूद और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।

तकनीक का उपयोग सीमित और उम्र के अनुसार करें।

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