नौकरी सरकारी लेकिन काम निजी अस्पताल का…नसबंदी कराने पहुंची महिला को भेज दिया निजी हॉस्पिटल..परिजन बोले होनी चाहिए कार्यवाही,डॉक्टर बोली मेरी कोई गलती नहीं,CMHO बोले जांच जारी
नसबंदी का ऑपरेशन कराने पहुंची महिला को सरकारी की बजाए निजी अस्पताल में किया सर्जरी
बिलासपुर।। कोरोना कॉल और उसके बाद अस्तित्व में आए निजी अस्पताल जिला और सिम्स हॉस्पिटल के रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। या तो ज्यादातर अस्पतालों में नसबंदी ऑपरेशन करने लायक तक व्यवस्था नहीं है या फिर सरकार के डॉक्टर वेल ट्रेंड नही है
दरअसल मामला छोटे से मुफ्त में होने वाले नसबंदी ऑपरेशन से कमाई का है जिसके चक्कर मे बेटी की आंत कट गई और पिता को अपनी बेटी को लेकर शहर के जिला अस्पताल फिर एसकेबी उसके बाद अपोलो ले जाना पड़ा। इतना ही नहीं बल्कि 7 लाख रुपये भी लग गए। अब पिता गुहार लगा रहा कि उसके साथ जो हुआ वो किसी के साथ न हो। इसके लिए उसने कलेक्टर,एसपी मंत्री और विधायक तक से गुहार लगाई है।
बता दे तखतपुर क्षेत्र के ग्राम लखासर निवासी सखाराम निर्मलकर की बेटी सुमन की शादी मस्तूरी में हुई है।शादी के बाद दो बच्चे भी हुए। इसके बाद उन्होंने नसबंदी कराने का मन बनाया। तब पति विष्णु अपने पत्नी का नसबंदी ऑपरेशन कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। जहां डॉ वंदना चौधरी ने खून जांच करने के बाद कहा कि जिला अस्पताल में कोई कर्मचारी नहीं है इसलिए उनका ऑपरेशन कही और कर सकते है। इसके बाद डॉक्टर ने नसबंदी कराने आई महिला को नसबंदी के लिए जरहभाटा के एसकेबी हॉस्पिटल
में जाने कहा कि वहाँ 15-17 हजार में अच्छे से ऑपरेशन हो जाएगा। विष्णु ने आगे बताया कि उनकी पत्नी सुमन को एसकेबी हॉस्पिटल ले गए शाम को ऑपरेशन के बाद जब सुमन को वार्ड में शिफ्ट किया गया। दर्द और लगातार उल्टियां होने के बाद भी सुमन को छुट्टी दे दी गई ।डॉक्टर और कर्मचारियों द्वारा कहा गया कि किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी ले जाइए और होगी तो फिर आप फोन करिए। वह रातभर दर्द से कराहती रही दूसरे दिन जब वे लोग उसे फिर डॉक्टर से संपर्क करके जिला अस्पताल और एसकेबी लेकर पहुंचे तो वहां स्थिति बिगड़ने लगी ।जिसके कारण सुमन को तुरंत अपोलो लेकर भर्ती किए। विष्णु ने बताया कि अपोलो में जांच के दौरान पता चला कि नसबंदी ऑपरेशन के दौरान उसकी आंत कट गई. है। बड़ी मुश्किल से उसकी जान बच सकी है। अभी भी उसका इलाज चल रहा है। पीड़िता के पति ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित परिवार और उसके पति ने कहा है कि फिर किसी बेटी के साथ ऐसा ना हो।
डॉक्टर पर कार्यवाही की मांग
पीड़ित महिला के पति विष्णु ने बताया कि इस मामले में दोषी डॉक्टर पर कार्यवाही होना चाहिए और उनका लाइसेंस निरस्त होना चाहिए ताकि अब किसी की बहु बेटी या फिर बहन के साथ ऐसी घटना न हो।जो डॉक्टर के पेशे के नाम पर धब्बा है।ऐसे लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंध पर कार्यवाही होना चाहिए जो मरीजों के जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते है।
पति,पिता और परिजन के अलावा समाज के लोग पहुंचे कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन
सुमन के पति ने बताया कि यह एक गंभीर मामला है और इस मामले को लेकर समाज के साथ कलेक्टर और एसपी के पास शिकायत की गई है।इसमें पीड़िता के पिता, पति और समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल रहे जिन्होंने कार्यवाही करने की मांग की है।उन्होंने बताया कि जरूरत हुई तो समाज के लोग भी खड़े होकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।
वर्जन
पीड़ित महिला के परिजनों की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ जांच समिति तैयार किया गया है। जिसकी जांच होने के बाद जो रिपोर्ट आएगी उसके अनुसार कार्यवाही होगी।
डॉ.प्रमोद तिवारी
सीएमएचओ बिलासपुर
वर्जन
हमारी तरफ से और एसकेबी अस्पताल की कोई गलती नहीं है।महिला को पहले से समस्या थी। हम रोज 9 से 10 नसबंदी का ऑपरेशन करते है अगर गलती रहती तो बता देते। उनके दबाव की वजह से उसी दिन ऑपरेशन करना पड़ा।उनके द्वारा लगाए गए आरोप गलत है।
डॉ. वंदना चौधरी
स्त्री रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल