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लिंगियाडीह वाले बोले,दो बार सर्वे हुआ,रसीद कटा पैसा जमा किए फिर भी मकान और दुकान को तोड़े दिए

बेजाकब्जा वालो को मकान,दुकान खाली करने का मिला मौका

नगर निगम ने एक दिन की राहत दी

बेजाकब्जाधारी खुद खाली करने लगे मकान और दुकान

बिलासपुर।लिंगियाडीह में रहने वाले लोगों का कहना है कि 2019 और 2021 में 3 हजार लोगों का सर्वे हुआ था जिसमें 509 लोगो के नाम का पट्टा आया था लेकिन पूर्व कांग्रेस पार्षद ने पट्टा बांटना उचित नहीं समझा जबकि पैसा देकर रशीद भी लिया गया था ।अब आज ऐसा हो गया है कि सब कुछ रहकर भी बेघर से हो गए है।

बता दे कि लिंगियाडीह में तोड़फोड़ की कार्यवाही पर थोड़ा सा विराम इसलिए लगाया गया है ताकि लोग अपने समान को खुद ले जा सके। और मकान दुकान खाली कर सके। ताकि तोड़फोड़ की कार्रवाई में किसी का कोई नुकसान न हो। इसके लिए नगर निगम ने एक दिन का ब्रेक दिया है। लिंगियाडीह में नगर निगम का तोड़फोड़ अभियान चल रहा है। दो दिनों से हुए ताबड़तोड़ अतिक्रमण हटाओ अभियान में हंगामा और उग्र प्रदर्शन हुआ यही नहीं लोगो ने विरोध करते हुए गाली गलौच तक दिया।कई लोग जेसीबी मशीन के सामने आ गए तो कई लोग कार्रवाई का खुलकर विरोध करने लगे थे।जिसके कारण अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। बाद में नगर निगम के अफसरों ने पुलिस के साथ मिलकर सख्ती दिखाई तो लोग धीरे से किनारे हटने लगे।और फिर नगर निगम का बुलडोजर चला जिसके कारण देखते ही देखते मकान दुकान और होटल धराशाई हो गया।
नगर निगम के अफसरों ने बताया कि लगभग 200 मकान और दुकान तोड़ने का आदेश है और उसके बाद सड़क को चौड़ीकरण करके अतिक्रमण मुक्त किया जायेगा।

एक दिन की मिली मोहलत
गुरुवार को नगर निगम ने लिंगियाडीह में कार्रवाई नहीं की,नगर निगम का कहना है कि अपील करते हुए आमजनों से बेजाकब्जा वालो से निवेदन किया गया है कि मकान दुकान और होटल या अन्य चीजें जो बेजाकब्जा में बनाकर रखा गया है उसे खुद खाली कर दे।अन्यथा नगर निगम का बुलडोजर चलेगा तो इसकी जिम्मेदारी आपकी खुद की होगी।नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ अभियान की कार्रवाई को देखते हुए आज लोगों ने घर खाली करना शुरू कर दिया होटल,दुकान और मकान से समान निकालना शुरू कर दिया और कही किराए के रूप में मकान दुकान लेकर शिफ्ट होना शुरू हो रहे है।

एक तरफ की हुई है कार्रवाई,दूसरी तरफ भी होगी कार्रवाई

नगर निगम का कहना है कि लिंगियाडीह के पूरी तरह से कार्रवाई होगी। किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा।चूंकि पूरा लिंगियाडीह ही बेजाकब्जा में है और लोग वर्षों से मकान दुकान बनाकर रह रहे थे।लेकिन बेजाकब्जा इतना ज्यादा कर लिए थे कि सड़क तक जाम हो गया था।लगातार चेतावनी के बाद भी जब कोई नहीं माना तब कही जाकर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया।जिसमें कई लोग इस बेजाकब्जा की सूची में शामिल रहे।

पार्षद और कुछ रसूखदारों का घर और दुकान भी बाकी है तोड़ना

नगर निगम ने बताया कि जब फिर से अभियान चलेगा तो इसमें पार्षद के घर दुकान और रसूखदारों को भी नहीं छोड़ा जाएगा।जो भी बेजाकब्जा के दायरे में आ रहा है उन सभी लोगों का मकान दुकान तोडा जायेगा।इसमें किसी तरह की कोई भी मुरव्वत नहीं है।
अगर अपने से खाली कर दिए तो अच्छी बात है अन्यथा नगर निगम का बुलडोजर चलेगा तो कुछ भी बर्दाश्त नहीं होगा।

अपोलो रोड,मुख्य रोड और राजकिशोर नगर रोड में हो गया है तोड़फोड़

नगर निगम ने जिस तरीके से अभियान चलाया है वह ताबड़तोड़ अभियान चला है।जेसीबी के माध्यम से तोड़फोड़ करके नगर निगम ने बेजाकब्जा वालो के आतंक को खत्म कर दिया है।और सख्त हिदायत भी दी है कि बेजाकब्जा करने वालो सावधान हो जाओ नहीं तो कार्यवाही होगी।

राजनीतिक रोटियां सेंकने वालो की भी नहीं गली दाल

लिंगियाडीह में कई ऐसे राजनीतिक नेता रहे जिन्होंने कहा था कि बेजाकब्जा नहीं टूटेगा और इसके लिए विधायक से लेकर मंत्री के बंगले तक पहुंचे।फिर आयुक्त से भी मिले।लेकिन किसी की दाल नहीं गली।बल्कि उनको साफ बोला गया को खाली कर दो नहीं।तो पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है।इससे राजनीतिक रोटियां सेंकने वालो का चेहरे देखने लायक रहा। जो अब नगर निगम की कार्रवाई के समय नजर नहीं आ रहे है।

कांग्रेस शासन काल में पट्टा वितरण करने की थी योजना,पूर्व पार्षद और एक कांग्रेस नेता ने रोका था

सूत्र बता रहे है कि लिंगियाडीह करीब 26 एकड़ में बसा हुआ है। जिसमें कई लोग वर्षों से रहकर जीवन यापन कर रहे है।लेकिन कांग्रेस सरकार ने गरीबों को पट्टा वितरण करने के लिए योजना बनाई और पट्टा वितरण करने के लिए भेजा भी लेकिन कांग्रेस के पूर्व पार्षद और एक कांग्रेस नेता ने पट्टा को रोककर रखा जिसके कारण वह पट्टा निरस्त होकर वापस चला गया और अब उस पार्षद की लापरवाही का नतीजा आमजनों को भुगतना पड़ रहा है। 2019 और 2021 में करीब 3000 लोगों का सर्वे किया गया था। लेकिन सरकार ने पट्टा सिर्फ 509 लोगो के लिए जारी किया था।लोग अपना मांगते रह गए लेकिन कांग्रेस के पूर्व नेताओं ने पट्टा को दबा दिया और किसी को नहीं बांटने दिया जिसके कारण पट्टा निरस्त होकर वापस राज्य सरकार के पास चला गया।

कांग्रेस सरकार में जमीन में काबिज रहने वालो ने जमा कराया गया था पैसा

बता रहे है कि जब सर्वे हुआ था तो वर्षों से रहने वालो ने 10 रूपये प्रति स्क्वेयर फीट के हिसाब से पैसा जमा किया था जिसका रसीद भी लोगो के पास है।जिनका कहना है कि पैसा लेकर रसीद दिया गया लेकिन पट्टा नहीं दिया गया और अब मकान और दुकान खाली करवा कर बेघर कर रहे है।सड़क चौड़ीकरण करना है तो कर लीजिए लेकिन किसी को बेघर मत करिए।बल्कि जितना तोड़ना था तोड़ लिए अब बाकी लोगों पर रहम कीजिए ताकि बाकी जिंदगी आराम से गुजर सके।

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