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बाबा अंबेडकर ने सामाजिक समरसता के लिए संघर्ष किया

बिलासपुर। ज़िला कांग्रेस कमेटी की ओर से मगरपारा चौक में बाबा भीमराव अंबेडकर की जयंती उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर देश निर्माण में उनके योगदान को याद कर किया। इस अवसर पर शहर अध्यक्ष विजय पांडेय ने कहा कि भीम राव अम्बेडकर ने देश सामाजिक समरसता स्थापना करने के लिये संघर्ष किया, तत्कालीन सामाजिक कुरूतियों को दूर कर उपेक्षित समाज को मुख्यधारा में जोड़ने का काम किया, संविधान में उन्होंने राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया और समाज के न्यूनतम लोगो के लिए पर्याप्त अधिकार निर्धारित किया ,आज भारत एक विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है इसमें भारतीय संविधान की प्रमुख भूमिका है ,पर आज कतिपय लोगो द्वारा संविधान को ही बदलने प्रयास किया जा रहा है, जब तक संविधान और उसमें निहित अधिकार संरक्षित ,सुरक्षित है तब तक में देश प्रजातंत्र रहेगा,ग्रामीण अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर का प्राम्भिक जीवन संघर्ष और कष्ट भरा था ।एक सूबेदार के घर मऊ मध्यप्रदेश में जन्म हुआ ,तीक्ष्ण बुद्धि ने अन्य बच्चों से उन्हें अलग करता था, विदेश से डि लीट की उपाधि प्राप्त कर प्रोफेसर ,पत्रकार रहे ,अंग्रेज के गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुए,और शोषित समाज के अधिकार के लिए लड़ते रहे,गैर कांग्रेसी होने के बाद भी पण्डित नेहरू ने उन्हें संविधान बनाने की बड़ी जिम्मेदारी दी ,प्रथम कानून मंत्री बने ,पर समाज मे व्याप्त कुरूतियों से व्यथित होकर बौद्ध धर्म अपनाना लिए और 6 दिसम्बर 1956 को इस महान सपूत का निर्वाण हुआ और देश ने नम आंखों से अपने इस लाडले को अंतिम विदाई दी ।
संयोजक ज़फ़र अली,हरीश तिवारी ने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर का अंतिम लक्ष्य शोषित समाज को ऊपर उठाना था।माधव ओत्तालवार, विनोद शर्मा,त्रिभुवन कश्यप,नरेंद्र बोलर,जितेंद्र पांडेय,राकेश शर्मा,उपस्थित थे ।

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