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प्रदेश में बीडीएस की सीटें बढ़ी, इस सत्र से 700 सीटों पर होगा प्रवेश, एक निजी कॉलेज को मिली मान्यता,कट ऑफ भी जाएगा कम

प्रदेश की राजधानी रायपुर में एक निजी डेंटल कॉलेज को 100 सीटों के लिए डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने अनुमति प्रदान की है। इसमें 50 सीट छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए आरक्षित रखा गया है। इसी सत्र से कॉलेज का संचालन किया जाएगा। अब तक प्रदेश की राजधानी में सिर्फ एक सरकारी डेंटल कॉलेज था। पर अब राजधानी में एक निजी डेंटल कॉलेज की भी शुरूआत हो जाएगी।

रायपुर। प्रदेश में बेचलर आफ डेंटल सर्जरी की सीटें बढ़ी है। डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने रायपुर में एक निजी कॉलेज को अनुमति दी है। इसके बाद प्रदेश में बैचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी की सीटें 600 से बढ़कर 700 ही गई है। सीटें बढ़ने से कट ऑफ मार्क्स भी कम जाएगा,जिसका सीधा फायदा छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को होगा।

प्रदेश में बैचलर ऑफ़ डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस की अब तक 600 सीटें थी। राजधानी रायपुर में एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज था। इसके अलावा प्रदेश के अन्य शहरों बिलासपुर,दुर्ग,भिलाई, राजनांदगांव में निजी कॉलेज संचालित थे। अब राजधानी रायपुर में ही एक निजी डेंटल कॉलेज श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज को बीडीएस की 100 सीटों के लिए डेंटल कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने अनुमति प्रदान की है।

उक्त कॉलेज रायपुर में स्थित है। अब राजधानी रायपुर में सरकारी के अलावा निजी डेंटल कॉलेज भी मिल गया है। राजधानी रायपुर के अभ्यर्थियों को डेंटल की पढ़ाई के लिए पहले दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर,राजनंदगांव जाना पड़ता था। अब सरकारी कॉलेज में चयन न होने की स्थिति में राजधानी के विद्यार्थियों के लिए राजधानी में ही विकल्प मिल गया है।

मिली जानकारी के अनुसार श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज में बीडीएस की जिन 100 सीटों के लिए अनुमति मिली है उनमें से 50 सीटें स्टेट कोटे की हैं,जिनमें सिर्फ छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थी ही प्रवेश लेने के लिए पात्र होंगे। खास बात यह है कि इसी शैक्षणिक सत्र से डेंटल की पढ़ाई श्री बालाजी कॉलेज में शुरू हो जाएगी। इसके लिए लेटर ऑफ इंडेंट भी जारी हो चुका है। अब बालाजी मेडिकल कॉलेज के एक ही कैंपस में एमबीबीएस के साथ बीडीएस के कोर्स का संचालन होगा।

पिछले वर्षों के रिकॉर्ड का अवलोकन करें तो अधिकतर डेंटल की सीटें खाली रह जाती थी। पर पिछले साल से बीडीएस में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ी है,जिसके चलते पिछले साल कुछ ही सीटें रिक्त रही थी। सीटें बढ़ने का फायदा छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को होगा। इस वर्ष सीटें बढ़ने से एंट्रेंस एग्जाम में कट ऑफ भी कम जाने की संभावना है।

एमबीबीएस में प्रवेश न मिलने पर बेहतर विकल्प:–

विज्ञान समूह के अभ्यर्थी 12वीं बायोलॉजी विषय से उत्तीर्ण करने के बाद मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के लिए वर्षों तक मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पीजी की तैयारी करते हैं। यदि विद्यार्थी सालों तैयारी के बाद भी एमबीबीएस में प्रवेश पाने से चूक जाते हैं तो वे बीडीएस में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा कर सकते हैं। अब तक रायपुर स्थित प्रदेश के एकमात्र सरकारी कॉलेज में 100 सीटें हैं। इसके अलावा बाकी पांच प्राइवेट कॉलेजों में 500 सीटें हैं। अब निजी कॉलेज को 100 सीटों की मान्यता मिलने के बाद प्रदेश में बीडीएस की सीटें बढ़कर 700 हो जाएंगी।

एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ाने की कवायद:–

बीडीएस के अलावा प्रदेश में चल रही निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें भी बढ़वाने की कोशिशें जारी है। प्रदेश में पांच निजी कॉलेज है। जिनमें से चार कॉलेजों ने 250 सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन दिया हुआ है। जुलाई तक जिसके लिए आदेश जारी होगा। वर्तमान में प्रदेश में 10 सरकारी और पांच निजी मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस की पढ़ाई करवा रहे हैं। जिनमें कुल 2130 सीटें हैं। रायपुर स्थित नेहरू मेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक 230 सीटें एमबीबीएस की है। सीटें बढ़ने से नीट एग्जाम में कट ऑफ मार्क्स गिरने और कम रैंक में प्रवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। प्रदेश के विद्यार्थियों को इसका फायदा मिलेगा।

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