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विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत पेंड्रा के किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण

पेंड्रा, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | 12 जून 2025
कृषि एवं कृषक कल्याण की दिशा में एक सशक्त पहल करते हुए विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के वैज्ञानिकों की टीम ने पेंड्रा विकासखंड के ग्राम पंडरीपानी एवं सलहेघोरी में किसानों के साथ एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु अनुकूल उन्नत कृषि तकनीकों, बीज प्रबंधन, रोग नियंत्रण और फसल विविधता जैसे विषयों पर प्रशिक्षित करना था।

इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर, वैज्ञानिक (पादप रोग विज्ञान) ने किसानों को फसल सुरक्षा एवं रोग प्रबंधन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के बीच फसल रोगों की प्रवृत्ति में भी बदलाव देखा जा रहा है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि वे फसल की नियमित निगरानी करें और प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर समय पर जैविक या समेकित रोग प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं।

उन्होंने धान में ब्लास्ट रोग, टमाटर में झुलसा रोग जैसी सामान्य समस्याओं की पहचान, उनके नियंत्रण के उपाय, तथा रोग-प्रतिरोधी किस्मों के प्रयोग पर भी प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने किसानों को सलाह दी कि अंधाधुंध रासायनिक दवाओं का प्रयोग न करें, बल्कि समेकित रोग प्रबंधन विधियों को अपनाकर आर्थिक और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखें।

डॉ. अवनीत कुमार, वैज्ञानिक (पादप प्रजनन एवं अनुवांशिकी) ने उन्नत किस्मों के चयन, बीज शुद्धता, फसल विविधता, और जलवायु परिवर्तन के अनुरूप कृषि रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि फसल की उपयुक्त किस्मों का चयन, बीजों की गुणवत्ता की जांच और विविध फसल चक्र अपनाने से न केवल उत्पादकता में वृद्धि होती है, बल्कि किसान प्राकृतिक जोखिमों के प्रति भी अधिक सक्षम बनते हैं।

इस कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारी हेमंत कुमार कश्यप ने ग्रामीण किसानों के बीच समन्वय बनाकर कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सराहनीय भूमिका निभाई। किसानों ने भी खुले मन से अपने सवाल पूछे और वैज्ञानिकों से समाधान प्राप्त किए।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने स्थानीय किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाई और उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों से अवगत कराया। वैज्ञानिकों की सहभागिता और ग्रामस्तर पर ऐसी पहल ग्रामीण कृषि की रीढ़ को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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