नदी से पानी नहीं,रेत चाहिए उलीच लीजिए रेत,बेशर्मों तुम्हें मां का दूध नहीं उसकी छाती का खून चाहिए

बोले कांग्रेस के प्रदेश सचिव महेश दुबे
बिलासपुर। सरकार बदली है रवैए नहीं व्यवस्थित एवं सुरक्षित यदि कोई कार्य हो रहा है,राज्य में समय के साथ भी समय के बाद भी तो वह कार्य अरपा सहित सभी नदियों का बेखौफ उत्खनन, जीवनदायी महत्व के बावजूद नदियाँ विनाश के कगार पर खड़ी है नदियाँ,जो कभी जीवनदायिनी थीं,आज बेदर्दी से हो रहें उत्खनन के चलतें दूषित हो रही हैं,जिससे उनका अस्तित्व खतरे में है, रेत के अभाव का परिणाम नदियाँ अपने प्राकृतिक स्वरूप से दूर होती जा रही हैं, जिससे जैव विविधता को नुकसान हो रहा है!
रेत माफियाओं ने अवैध नदी खनन को एक संपन्न उद्योग में बदल दिया है,रंगरूट युवाओं और ग्रामीणों को पैसा और पावर वादे के साथ लुभाया जा रहा है. अपराध और गड्ढायुक्त नदियां एक ही सिक्के के दो पहलू बन चुके हैं.!
भोजन, जल, बिजली, परिवहन, स्वच्छता, मनोरंजन आदि के स्रोत के रूप में नदियाँ समृद्ध और विविध पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करती हैं जो विश्व भर में मानव समाजों की रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करती हैं,रेत-खनन से नदियों का प्रवाह-पथ प्रभावित होता है,जिसे निकटवर्ती क्षेत्रों का भू-जल स्तर बुरी तरह प्रभावित होगया है,प्राकृतिक रूप से पानी को शुद्ध करने में रेत की बड़ी भूमिका होती है,रेत खनन के कारण नदियों की स्वतः जल को साफ कर सकने की क्षमता पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है!!