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अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण : कृषि छात्रों ने किया राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान का अवलोकन

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर की अभिनव पहल

बिलासपुर, 23 जून 2025 – कृषि शिक्षा को व्यवहारिक और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के बी.एससी. (कृषि) तृतीय वर्ष के कुल 47 छात्र-छात्राओं का एक शैक्षणिक दल आज अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण पर रवाना हुआ। यह भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम AHPD-5321 (Educational Tour/Field Visit) के अंतर्गत आयोजित किया गया है।

छात्रों के इस शैक्षणिक भ्रमण दल का कुशल नेतृत्व डॉ. (श्रीमती) अर्चना केरकट्टा, सह-प्राध्यापक (कीट विज्ञान), डॉ. (ले.) रोशन परिहार, सहायक प्राध्यापक (अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन), तथा डॉ. यशपाल सिंह निराला, सहायक प्राध्यापक (कीट विज्ञान) के द्वारा किया जा रहा है।

इस भ्रमण का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को देश के अग्रणी कृषि अनुसंधान संस्थानों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी विकास केंद्रों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना है, ताकि वे शैक्षणिक पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़ते हुए कृषि क्षेत्र के नवीनतम अनुसंधानों, तकनीकों, उत्पादन विधियों एवं विस्तार गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। इस प्रकार की यात्राएँ विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रयोगात्मक दक्षता तथा करियर केंद्रित सोच विकसित करने में सहायक होती हैं।

भ्रमण का पहला पड़ाव: राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान, कटक (ओडिशा)

शैक्षणिक भ्रमण के प्रथम चरण में आज दिनांक 23 जून 2025 को छात्रगण ने ओडिशा स्थित प्रतिष्ठित संस्थान आईसीएआर – राष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (NRRI), कटक का भ्रमण किया। यह संस्थान देश में धान की वैज्ञानिक खेती, अनुसंधान एवं नवाचार के लिए अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने निम्नलिखित प्रमुख इकाइयों एवं प्रयोगशालाओं का भ्रमण कर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं:

  • जैव उर्वरक उत्पादन इकाई – जहाँ छात्रों ने नाइट्रोजन फिक्सिंग एवं फॉस्फेट सोलुबिलाइजिंग सूक्ष्मजीवों के उत्पादन प्रक्रिया को देखा।
  • अजोला उत्पादन इकाई – छात्रों को अजोला की उपयोगिता, उत्पादन विधि एवं धान के साथ इसके सहयोगी उपयोग पर व्याख्यान दिया गया।
  • धान म्यूज़ियम – जहाँ धान की विभिन्न देशी एवं उन्नत किस्मों, उनके विकास क्रम और इतिहास को विद्यार्थियों ने देखा और समझा।
  • जैव प्रौद्योगिकी विभाग – इस विभाग में छात्रों को जीन संपादन, ऊतक संवर्द्धन, और मार्कर-असिस्टेड सेलेक्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का सजीव प्रदर्शन दिखाया गया।

छात्रों ने संस्थान के वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपने जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। संस्थान के अधिकारियों ने भी विद्यार्थियों की जिज्ञासा एवं सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

इस प्रकार की शैक्षणिक यात्राएँ न केवल छात्रों के ज्ञान को समृद्ध करती हैं, बल्कि उन्हें भावी कृषि वैज्ञानिक, उद्यमी या विस्तार अधिकारी बनने के लिए प्रेरित भी करती हैं।

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