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अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण : कृषि छात्रों ने किया विशाखापट्टनम स्थित इंदिरा गांधी जूलॉजिकल पार्क का अवलोकन…बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय,बिलासपुर की अभिनव पहल

बिलासपुर, – कृषि शिक्षा को व्यवहारिक, प्रायोगिक और अनुभवात्मक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर तथा कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, लोरमी-मुंगेली के बी.एससी. (कृषि) तृतीय वर्ष के 47 छात्र-छात्राओं का एक संयुक्त शैक्षणिक दल अंतरराज्यीय शैक्षणिक भ्रमण पर उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक एवं प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण कर रहा है। यह भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम AHPD-5321 के अंतर्गत आयोजित किया गया।

शैक्षणिक भ्रमण का नेतृत्व डॉ. अर्चना केरकट्टा, डॉ. (ले.) रोशन परिहार एवं डॉ. यशपाल सिंह निराला द्वारा किया गया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न राज्यों के कृषि वातावरण, जैव विविधता, संसाधन प्रबंधन एवं व्यवहारिक ज्ञान से जोड़ना रहा।

भ्रमण का अंतिम पड़ाव: इंदिरा गांधी जूलॉजिकल पार्क, विशाखापट्टनम

आज दिनांक 28 जून 2025 को भ्रमण के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने आंध्र प्रदेश के प्रमुख जैविक पर्यटन स्थल इंदिरा गांधी जूलॉजिकल पार्क, विशाखापट्टनम का शैक्षणिक अवलोकन किया।

यह पार्क देश के सबसे बड़े और जैव विविधता से भरपूर प्राणी उद्यानों में से एक है, जो लगभग 625 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। पूर्वी घाट की हरियाली से घिरे इस पार्क में लगभग 850 से अधिक वन्य प्राणी संरक्षित हैं, जिनमें बाघ, शेर, तेंदुआ, भालू, हाथी, घड़ियाल, कोबरा, एमू, पेंग्विन और अनेक पक्षी व सरीसृप प्रजातियाँ शामिल हैं।

पार्क की विशेषता इसके थीम आधारित एनक्लोज़र हैं, जिनमें शेर सफारी, डियर सफारी, रेप्टाइल हाउस और एवियरी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहां वन्यजीवों के संरक्षण, प्रजनन और पर्यावरणीय शिक्षा हेतु नियमित कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। पार्क में ग्रीन ज़ू कॉन्सेप्ट, सौर ऊर्जा का उपयोग, प्लास्टिक निषेध, और ई-गाइड जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं, जो इसे आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाती हैं।

विद्यार्थियों ने इस अवलोकन के दौरान जैव विविधता, वन्यजीव प्रबंधन, संरक्षण विधियों, प्रजातियों की जीवन शैली एवं उनके आवासों की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त की। यह भ्रमण उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक रहा।

आभार एवं समापन

छात्रों ने इस शैक्षणिक अवसर हेतु कृषि महाविद्यालय, बिलासपुर के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. चौरे तथा कृषि महाविद्यालय, लोरमी के अधिष्ठाता डॉ. एस.एल. स्वामी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। साथ ही दल का कुशल मार्गदर्शन करने वाले शिक्षकों के प्रति भी आभार प्रकट किया, जिनके सहयोग से यह भ्रमण सफल एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ।

इस प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ वास्तविक जीवन अनुभव प्रदान कर, उनमें प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता, तथा समग्र कृषि दृष्टिकोण के विकास में सहायक सिद्ध होता है। यह पहल निश्चित ही कृषि शिक्षा में व्यवहारिकता लाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।

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