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वास्तविक लोकतंत्र तो रथयात्रा हैं – ललित

बिलासपुर।वैष्णव मतावलंबियों के अनुसार भगवान विष्णु बद्रीनाथ, द्वारिका, रामेश्वरम व पूरी चारो धाम में विराजित हैं। ललित अग्रवाल ने बताया कि रथयात्रा एक पारंपरिक हिंदू त्यौहार है, जिसमें भगवान जगन्नाथजी, बहन सुभद्रा व दाऊ भैया बलरामजी के साथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकल कर आम जनता को दर्शन देते है। उनकी विशाल प्रतिमा को एक रथ पर रखकर सड़कों पर निकाला जाता है। जिसे श्रद्धालु स्वयं खींच कर ले जाते है। रथयात्रा की निम्न विशेषताए हैं।

- सामाजिक एकता: रथयात्रा के दौरान लोगों का एकत्र होना और सामूहिक रूप से पूजा करना सामाजिक एकता और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देता है।
- स्वास्थ्य लाभ: रथयात्रा के दौरान रथ को खींचने और अन्य गतिविधियों में भाग लेने से शारीरिक व्यायाम होता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
- मानसिक शांति: रथयात्रा के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने से मानसिक शांति और संतुष्टि मिलती है।
- पर्यावरण संरक्षण: रथयात्रा के दौरान उपयोग किए जाने वाले रथ और अन्य सामग्री को बनाने में स्थानीय कला और शिल्प का उपयोग होता है, जो पर्यावरण संरक्षण में मदद करता है।
- सांस्कृतिक महत्व: रथयात्रा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक त्योहार है, जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर और परंपराओं को संरक्षित करने में मदद करता है।
इस्कॉन प्रचार केंद्र बिलासपुर द्वार आज वृहस्पतिवार बाजार से भव्य रथयात्रा निकाली गई। इसमें केंद्र प्रभारी युगल किशोर दास सहित सैकड़ों की तादाद में भक्तगण शामिल हुए। छोटा सा चुनाव जीतकर जन प्रतिनिधि अपने आप को बड़ा समझने लगते हैं, जबकि जगत के नाथ जनता के समक्ष स्वयं जाकर उनका हाल चाल पूछ कर आर्शीवाद देते हैं।