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सारंगढ़ में पत्रकार पर जानलेवा हमला : गर्दन पर किया वार, बाल-बाल बचा युवा पत्रकार…

सारंगढ़-बिलाईगढ़। सारंगढ़ के घौठला बड़े बाजार में मंगलवार शाम 6 बजे उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक युवा पत्रकार पर भीड़भरे बाजार में जानलेवा हमला कर दिया गया। घटना तब हुई जब पत्रकार जगन्नाथ बैरागी अपनी माताजी और भतीजी के साथ बाजार में थे।

बताया जा रहा है कि नशे में धुत आदतन अपराधी बसित सिदार ने मामूली बहाने पर पत्रकार से विवाद शुरू किया और देखते ही देखते गले पर किसी नुकीली चीज से वार कर दिया। आरोपी के साथ आनंद बरेठ नामक युवक भी हमले में शामिल था। स्थानीय लोगों की तत्परता से पत्रकार की जान बच सकी, लेकिन गले पर गंभीर चोट आई है।

कानून और पुलिस के प्रति खत्म होता भय : इस घटना ने न सिर्फ पत्रकार जगन्नाथ बैरागी बल्कि पूरे पत्रकार समाज और आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ बाजार में परिवार संग मौजूद पत्रकार पर हमला, दूसरी ओर खुलेआम जान से मारने की धमकी — ये दर्शाता है कि अब अपराधियों के मन से पुलिस और कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।

“आम जनता सुरक्षित नहीं, जब पत्रकार भी असुरक्षित हैं” – नरेश चौहान : घटना की सूचना मिलते ही अखिल भारतीय पत्रकार संघ के अध्यक्ष नरेश चौहान, जिला प्रेस क्लब के सचिव संतोष चौहान और श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रतिनिधि कोतवाली पहुंचे और मामले को गंभीर बताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। नरेश चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“यह हमला किसी एक पत्रकार पर नहीं, बल्कि पूरी पत्रकार बिरादरी पर हमला है। गर्दन पर वार साफ तौर पर हत्या के इरादे को दर्शाता है। यदि जल्द और कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो जिला भर के पत्रकार उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

थाना प्रभारी की प्रतिक्रिया : जल्द गिरफ्त में होंगे आरोपी : कोतवाली थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली गई है, मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है। दोनों आरोपियों की तलाश जारी है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बाजारबड़े पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि ओमप्रकाश (अंबू) पटेल ने कहा :

“हम कानून के साथ हैं। पत्रकार पर हमला निंदनीय है, ग्राम स्तर पर भी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कोई भी व्यक्ति कानून से बड़ा नहीं है।”

वहीं पूर्व सरपंच प्रतिनिधि देवनारायण पटेल ने बताया :

“बसित सिदार एक आदतन अपराधी है और हमेशा नशे की हालत में रहता है। ऐसे तत्वों से गांव की छवि बदनाम हो रही है। इनपर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।”

अब सवाल पुलिस-प्रशासन से: कब तक खुला घूमते रहेंगे अपराधी? : इस हमले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार पेशे से जुड़े लोगों की जान भी सुरक्षित नहीं है? अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की सुरक्षा का दावा खोखला नहीं तो और क्या है?

अब देखने वाली बात यह होगी कि सारंगढ़ पुलिस इन आदतन अपराधियों को कब तक गिरफ्तार करती है, और क्या इस हमले को एक “साधारण विवाद” की तरह लीपापोती कर दिया जाएगा या फिर अपराधियों पर प्राणघातक हमले और धमकी जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई कर एक मिसाल कायम की जाएगी?

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